Budget 2025: कल पेश होगा बजट 2025, जानें इसका कैसे पड़ेगा शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2025 यानी कल केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट वाले हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव के साथ हुई, लेकिन आज स्टॉक मार्केट में शानदार तेजी देखने को मिली।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2025 यानी कल केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट वाले हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव के साथ हुई, लेकिन आज स्टॉक मार्केट में शानदार तेजी देखने को मिली। लगभग सभी ब्लूचिप्स कंपनियों के शेयर हरे निशान पर हैं। हालांकि, पिछले एक महीने में Nifty 50 में 2% और सेंसेक्स में 2.19% की गिरावट आई।
शेयर बाजार में आई तेजी के बाद अब निवेशकों का पूरा फोकस कल बजट में होने वाले एलानों पर बनी हुई है। बजट में होने वाले एलान शेयर बाजार का मुख्य चालक है। वहीं, कई निवेशकों का मानना है कि अगर इस बार बजट में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने की कोशिश की जाती है, तो बाजार में शानदार तेजी वापस लौट सकती है।
रेलिगेयर ब्रोकरेज के रवि सिंह का मानना है कि अगर बजट में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने की कोशिश की जाती है, तो इससे शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है। सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.5% हो सकता है। वहीं, अगर पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) बढ़ाया जाता है, तो इससे घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह देखना जरूरी होगा कि इस लक्ष्य को निवेशक किस नजरिए से देखते हैं और यह देश के आर्थिक विकास और स्थिरता से कितना मेल खाता है।
कैसी है राजस्व कलेक्शन की स्थिति
प्रभुदास लीलाधर के अमनीश अग्रवाल ने कहा कि चालू कारोबारी साल में GST कलेक्शन कमजोर रहने, शहरी मांग में कमी और कॉर्पोरेट टैक्स स्थिर रहने के कारण सरकार के राजस्व में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि, आयकर (Income Tax) में 8 महीनों के दौरान 23.5% की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार का खर्च (Revenue Expenditure) अनुमान से ज्यादा हो सकता है, जबकि कम GDP ग्रोथ और कम पूंजीगत खर्च की वजह से 2025 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.9% रह सकता है।
ये बजट हो सकता है खास
एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के सीईओ अजय गर्ग का कहना है कि सरकार राजकोषीय घाटे को 4.5% से 4.9% के बीच रखने की कोशिश कर सकती है, जिससे आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बना रहे।
स्टॉक्सबॉक्स के मनीष चौधरी का मानना है कि अगर सरकार वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.5% का राजकोषीय घाटा लक्ष्य तय करती है, तो इससे शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
