डॉलर के मुकाबले आज रुपया उछला! अब $1 का इतना हुआ भाव - इस वजह से मजबूत हुई भारतीय करेंसी
डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ चुका रुपया अब फिर संभलता दिख रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और RBI के बड़े कदमों ने बाजार को राहत दी है। जानिए कैसे रुपये की मजबूती पेट्रोल-डीजल, महंगाई और आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है।

पिछले कुछ दिनों से लगातार दबाव में चल रहा भारतीय रुपया अब थोड़ा संभलता दिख रहा है। सोमवार सुबह रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और हाल की गिरावट से उबरने लगा। अभी 1 डॉलर का भाव 95.26 रुपये है।
इस तेजी के पीछे दो बड़ी वजहें मानी जा रही हैं पहली, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते की उम्मीद, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। दूसरी, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि रुपया शायद जरूरत से ज्यादा कमजोर हो गया था और रिजर्व बैंक बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
आखिर रुपया मजबूत क्यों हुआ?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। इससे इन्वेस्टर्स को लगा कि भारत पर फॉरेन एक्सचेंज का दबाव कुछ कम हो सकता है और यही वजह है कि रुपये में रिकवरी देखने को मिली।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक इंटरव्यू में कहा कि हाल की गिरावट के बाद रुपया ओवरवैल्यूड यानी जरूरत से ज्यादा मजबूत नहीं था। उन्होंने यहां तक कहा कि कुछ मानकों के हिसाब से रुपया कम आंका गया हो सकता है।
मल्होत्रा ने साफ किया कि RBI किसी खास स्तर पर रुपये को रोकने की कोशिश नहीं करता। केंद्रीय बैंक का मकसद सिर्फ इतना है कि बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो। साथ ही अगर बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी या अस्थिरता दिखती है, तो RBI व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाता है।
सरकार को मिला रिकॉर्ड फायदा
इसी बीच RBI ने FY 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर देने का ऐलान किया है। यह रकम पिछले साल के ₹2.69 लाख करोड़ से ज्यादा है, लेकिन सरकार ने बजट में इससे भी अधिक यानी ₹3.16 लाख करोड़ की उम्मीद जताई थी।
RBI ने ज्यादा पैसा क्यों बचाकर रखा?
RBI ने इस बार संभावित आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए ₹1.09 लाख करोड़ का बड़ा जोखिम बफर (Contingency Risk Buffer) अलग रखा है।यह रकम पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे RBI को फ्यूचर में बाजार में जरूरत पड़ने स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी।
India Ratings & Research के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत का कहना है कि बड़ा जोखिम बफर RBI को बदलती आर्थिक परिस्थितियों में ज्यादा ताकत देगा।
वहीं MK Global Financial Services की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के मुताबिक RBI को इस बार बड़ा फायदा सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज आय और मजबूत विदेशी मुद्रा कमाई से हुआ है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि RBI को घरेलू और विदेशी संपत्तियों पर संभावित नुकसान की भरपाई के लिए ज्यादा प्रावधान भी करने पड़े हैं।
हाल के दिनों में कितना गिरा था रुपया?
साल 2026 में अब तक रुपया करीब 6% कमजोर हो चुका है। पिछले हफ्ते यह डॉलर के मुकाबले 96.90 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।हालांकि इसके बाद RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर दखल दिया, जिससे रुपये को सहारा मिला।
- 21 मई को रुपया 96.37 प्रति डॉलर पर बंद हुआ
- 22 मई को यह सुधरकर 95.69 तक पहुंचा
- 25 मई को बाजार खुलते ही रुपया 95.34 पर पहुंच गया और बाद में 95.20 तक आया।
RBI के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार है?
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) फिलहाल करीब 700 अरब डॉलर के आसपास हैं। यही वजह है कि RBI जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देता है।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर रुपया मजबूत रहता है और तेल की कीमतें नीचे रहती हैं, तो इसका फायदा आम लोगों को सीधा मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आएगी, विदेशों से आने वाले सामान के दाम में कम होंगे और बढ़ती महंगाई से थोड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान रिश्तों, कच्चे तेल की कीमतों और RBI की अगली चाल पर टिकी हुई है।

