scorecardresearch

बस हादसों पर सरकार सख्त, नितिन गडकरी ने बताया क्यों बदला Bus Body Code

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बस सुरक्षा नियमों को सख्त करने की वजह बताई है। उन्होंने कहा कि 2024 में बसों से जुड़े हादसों में 3,855 लोगों की मौत हुई। नए नियमों में बसों के रजिस्ट्रेशन से पहले टाइप अप्रूवल के साथ फिजिकल और वीडियो इंस्पेक्शन जरूरी किया गया है।

Advertisement

In Short

  • केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 2024 में बसों से जुड़े हादसों में 3,855 लोगों की मौत हुई।
  • नितिन गडकरी ने कहा कि नए नियमों में बस रजिस्ट्रेशन के लिए टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है।
  • ARAI और ICAT ने टेस्टिंग फीस 50% घटाई, प्रक्रिया का समय चार महीने से घटाकर छह हफ्ते किया।

देश में बस हादसों और उनमें होने वाली मौतों को देखते हुए बस बॉडी से जुड़े सुरक्षा नियमों को सख्त किया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2024 में बसों से जुड़े हादसों में 3,855 लोगों की मौत हुई। इसी वजह से बस बॉडी कोड को लागू करने में देरी के बाद अब नए नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन और जांच की प्रक्रिया को सख्त बनाया गया है।

advertisement

3,855 मौतों के बाद सख्त हुए नियम

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 2024 में बसों से जुड़े हादसों में 3,855 मौतें हुईं और यह संख्या सबसे ज्यादा रही। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बस बॉडी बनाने वाली इकाइयों को अपनी क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने का मौका दिया गया लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने राजस्थान और मध्य प्रदेश में बस हादसों और आग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों की जान बचाना सरकार की जिम्मेदारी है और सुरक्षा के मामले में समझौता नहीं किया जा सकता।

1 सितंबर 2025 से बदला बस बॉडी कोड

गडकरी के मुताबिक बस बॉडी कोड को 1 सितंबर 2025 से संशोधित किया गया। पहले मैनुअल बस बॉडी बिल्डर सेल्फ सर्टिफिकेशन के जरिए बस का रजिस्ट्रेशन करा सकते थे।

नए नियम के तहत अब बस को रजिस्ट्रेशन तभी मिलेगा जब उसे किसी टेस्टिंग एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेशन मिलेगा। इसे अनिवार्य कर दिया गया है।

फिजिकल और वीडियो इंस्पेक्शन भी जरूरी

नए सेफ्टी सिस्टम में हर बस के लिए अलग चेकलिस्ट तैयार होगी। इस चेकलिस्ट को एक पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

बस के फिजिकल और वीडियो इंस्पेक्शन के बिना उसका रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। गडकरी ने कहा कि वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए यह जांचा जाएगा कि बस तय मानकों पर खरी उतर रही है या नहीं।

छोटे बस बॉडी बिल्डर्स को भी राहत

गडकरी ने कहा कि नए नियमों का असर 600 से ज्यादा बस बॉडी बनाने वाली इकाइयों और करीब 75,000 कर्मचारियों पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी भी इस सेक्टर के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनसे मिले थे।

उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग की मदद और सहयोग के लिए तैयार है लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

टेस्टिंग फीस घटाकर 14 लाख रुपये

उद्योग की मदद के लिए ARAI और ICAT ने टेस्टिंग फीस में 50 फीसदी की कटौती की है। पहले टेस्टिंग की लागत 30 से 40 लाख रुपये तक थी, जिसे घटाकर करीब 14 लाख रुपये किया गया है।

advertisement

इसके अलावा टेस्टिंग प्रक्रिया की समय सीमा चार महीने से घटाकर छह सप्ताह कर दी गई है। सभी मंजूर जरूरी सेफ्टी कंपोनेंट की सूची भी बस बॉडी बिल्डर्स को दी जा रही है ताकि वे सही कंपोनेंट चुन सकें और प्रक्रिया में देरी न हो।