
गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे की 15 साल की देरी पर जताई शर्मिंदगी, बोले- उद्घाटन में नहीं आऊंगा
नितिन गडकरी ने मुंबई-गोवा हाईवे की 15 साल की देरी को शर्मनाक बताया और कहा कि वह इसके उद्घाटन में नहीं आएंगे. उन्होंने अक्टूबर में खुद सड़क मार्ग से सफर कर काम की स्थिति देखने और देरी के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही.

In Short
- 2011 में शुरू परियोजना 2016 तक पूरी होनी थी, लेकिन लगातार अटकी
- फरवरी में सरकार ने 485 किमी में से 465 किमी फोरलेन बताया
- जून 2026 की डेडलाइन बीत गई, फिर भी करीब 20 किमी बाकी
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में करीब 15 साल की देरी पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे शर्म की बात बताते हुए कहा कि जब यह प्रोजेक्ट पूरा होगा तो वह इसके उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे।
गडकरी ने कहा कि वह अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुंचकर सड़क के रास्ते गोवा जाएंगे और खुद जांच करेंगे कि हाईवे से सफर वास्तव में यात्रियों के लिए आसान हुआ है या नहीं।
देरी से नाराज गडकरी ने ठेकेदारों पर कार्रवाई की बात कही
गोवा के पोरवोरिम में एक छह लेन एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान गडकरी ने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे के काम में हुई देरी से वह शर्मिंदा हैं। उन्होंने कहा कि वह अधिकतम ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि अब खराब काम और देरी के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
2011 में शुरू हुआ था हाईवे का काम
मुंबई-गोवा हाईवे चौड़ीकरण परियोजना की शुरुआत साल 2011 में हुई थी। इसका उद्देश्य पुराने दो लेन हाईवे को चार लेन में बदलना और मुंबई से गोवा के सफर का समय करीब 12 घंटे से घटाकर 6 घंटे करना था।
इस प्रोजेक्ट को साल 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई बार इसकी समय सीमा बढ़ाई गई।
ज्यादातर काम पूरा, कुछ हिस्से अभी बाकी
मुंबई-गोवा हाईवे की कुल लंबाई करीब 485 किलोमीटर है। सरकार के मुताबिक, पनवेल से गोवा-महाराष्ट्र बॉर्डर तक 465 किलोमीटर हिस्से को चार लेन किया जा चुका है, जबकि करीब 20 किलोमीटर काम बाकी है।

हालांकि, कई महत्वपूर्ण हिस्से, बाईपास, पुल और अन्य काम अभी पूरे नहीं हुए हैं। इसी वजह से पूरा कॉरिडोर अभी तक पूरी तरह चार लेन हाईवे की तरह काम नहीं कर पा रहा है।
देरी के पीछे कई कारण
इस प्रोजेक्ट में देरी के लिए जमीन से जुड़े मुद्दे, पर्यावरण और अन्य मंजूरी, ठेकेदारों की समस्याएं और धीमी रफ्तार से काम को जिम्मेदार बताया गया है।
इसके अलावा, हाईवे के कुछ हिस्सों में मानसून के बाद गड्ढे और सड़क खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यात्रियों को कई जगह डायवर्जन, जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
₹16 हजार करोड़ की परियोजना
मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना पर करीब ₹16,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट में बाईपास, पुल, फ्लाईओवर और अन्य ढांचे शामिल हैं, जिससे यात्रा आसान और सुरक्षित हो सके।
पूरा होने के बाद यह हाईवे मुंबई, कोंकण क्षेत्र और गोवा के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करेगा। इससे पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

