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हाईवे पर गड्ढे और टूटी सड़कें अब नहीं बचेंगी निगरानी से! NHAI ला रहा नया सिस्टम, कंपनियों ने रखी बड़ी मांग

देश के नेशनल हाईवे पर गड्ढों और खराब सड़कों की निगरानी का तरीका बदल सकता है। NHAI ड्रोन, कैमरों और डिजिटल सिस्टम के जरिए सड़कों की खामियों पर नजर रखने की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस नई व्यवस्था के बीच हाईवे बनाने वाली कंपनियों ने भुगतान और ठेकों की शर्तों को लेकर अहम सवाल उठाए हैं। जानें पूरा मामला।

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अब ड्रोन और कैमरों से होगी नेशनल हाईवे की निगरानी
अब ड्रोन और कैमरों से होगी नेशनल हाईवे की निगरानी

In Short

  • NHAI हाईवे की निगरानी के लिए ड्रोन, वेबकैम और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है।
  • नए सिस्टम से सड़क की खराबियों की पहचान, नोटिस जारी करने और मरम्मत की समयसीमा पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
  • NHBF ने सख्त निगरानी के साथ ठेकेदारों के लिए पर्याप्त भुगतान और व्यावहारिक ठेका शर्तों की मांग की है।

देश के नेशनल हाईवे की देखरेख में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब हाईवे की निगरानी के लिए ड्रोन, वेबकैम और नई डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इससे सड़कों पर गड्ढों और दूसरी खराबियों का जल्दी पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, सड़क बनाने और उनकी देखरेख करने वाली कंपनियों ने इस नई व्यवस्था को लेकर कुछ अहम मांगें रखी हैं।

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नेशनल हाईवेज बिल्डर्स फेडरेशन (NHBF) का कहना है कि निगरानी के नियम सख्त करने के साथ कंपनियों को सड़क की देखरेख के लिए पर्याप्त भुगतान भी मिलना चाहिए।

ड्रोन और कैमरों से कैसे होगी हाईवे की निगरानी?

NHAI के चेयरमैन ने NHBF के सदस्यों के सामने नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी है। इस सिस्टम में वेबकैम, ड्रोन सर्वे और तकनीक की मदद से सड़क की खराबियों का अपने आप पता लगाने की व्यवस्था शामिल होगी।

अगर किसी हाईवे पर गड्ढा, सड़क टूटने या दूसरी कोई समस्या सामने आती है, तो सिस्टम उसकी पहचान करके संबंधित एजेंसी को नोटिस भेज सकेगा।

इसके अलावा लाइव डैशबोर्ड से यह भी पता चलेगा कि सड़क की मरम्मत का काम कितने समय में पूरा हुआ। अधिकारी अपने दफ्तर से ही इसकी निगरानी कर सकेंगे।

हाईवे बनाने वाली कंपनियों ने क्या मांग की?

NHBF ने कहा है कि सड़कों की निगरानी सख्त होने के साथ उनके रखरखाव के लिए मिलने वाली रकम भी बढ़ाई जानी चाहिए।

सड़क की देखरेख में कर्मचारियों की सैलरी, मशीनों, निर्माण सामग्री, गड्ढों की मरम्मत, पानी की निकासी और सुरक्षा उपकरणों पर खर्च होता है। फेडरेशन के मुताबिक, कंपनियों को टेंडर भरते समय इन सभी खर्चों का सही अनुमान लगाना चाहिए।

अगर कोई कंपनी सिर्फ ठेका हासिल करने के लिए बहुत कम कीमत पर बोली लगाती है, तो आगे चलकर उसे आर्थिक नुकसान और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

अब सड़क खराब होने से पहले करनी होगी मरम्मत

नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने पर कंपनियों को सड़क खराब होने का इंतजार करने के बजाय पहले से उसकी जांच और रखरखाव पर ध्यान देना होगा।

NHBF का कहना है कि ठेकेदारों को नियमित निरीक्षण, बेहतर योजना और समय पर मरम्मत की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। साथ ही सड़क निर्माण के ठेकों में सिर्फ शुरुआती लागत नहीं, बल्कि पूरी अवधि में होने वाले रखरखाव के खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

आम लोगों को क्या फायदा होगा?

अगर नई निगरानी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो हाईवे पर गड्ढों और खराब सड़कों की पहचान जल्दी हो सकेगी। इससे समय पर मरम्मत और यात्रियों की सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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हालांकि, NHBF का कहना है कि बेहतर सड़कों के लिए सिर्फ सख्त निगरानी काफी नहीं है। कंपनियों को पर्याप्त भुगतान और व्यावहारिक ठेका शर्तें मिलना भी जरूरी है।