तिरुपति लड्डू केस: घी के नाम पर पाम ऑयल और केमिकल की मिलावट का आरोप! ED ने खोली करोड़ों की हेराफेरी
तिरुपति मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी की सप्लाई के मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने करीब ₹130 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में पाम ऑयल, केमिकल और फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप सामने आया है। जानें किन कंपनियों पर कार्रवाई हुई और कैसे चल रहा था पूरा कारोबार।

In Short
- तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी के मामले में ED ने ₹129.85 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं।
- ED का आरोप है कि TTD को ₹234.5 करोड़ का मिलावटी घी सप्लाई किया गया, जिसमें पाम ऑयल और केमिकल का इस्तेमाल हुआ।
- मामले में अब तक ₹132.55 करोड़ की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज, दो प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी।
तिरुपति मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी इस्तेमाल करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ₹129.85 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को करीब ₹234.5 करोड़ का मिलावटी घी सप्लाई किया गया था।
इस मामले में अब तक अटैच, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों और रकम का कुल मूल्य ₹132.55 करोड़ पहुंच गया है।
किन कंपनियों और लोगों पर हुई कार्रवाई?
ED की हैदराबाद जोनल ऑफिस ने भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरीमिल्क प्राइवेट लिमिटेड, श्री वैष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड और सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियां अटैच की हैं।
इनमें कंपनियों के प्रमोटर विपिन जैन, पोमिल जैन, कैलाश चंद मंगला और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियां भी शामिल हैं।
ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की है।
कैसे तैयार किया जाता था मिलावटी घी?
ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि असली घी की जगह रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन में अलग-अलग केमिकल मिलाकर घी तैयार किया जाता था।
इसमें मोनोग्लिसराइड्स, एसिटिक एसिड एस्टर, लैक्टिक एसिड और बीटा-कैरोटीन जैसे पदार्थ इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मिलावटी घी भोले बाबा और सुकृति फूड्स की फैक्ट्रियों में तैयार होता था। इसके बाद दूसरी डेयरी कंपनियों के नाम से टेंडर लेकर TTD को सप्लाई किया जाता था। बदले में इन कंपनियों को कमीशन दिया जाता था।
फर्जी बिल और हवाला से कैसे छिपाया गया कारोबार?
ED का आरोप है कि मिलावट के इस कारोबार को छिपाने के लिए कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड तैयार किए।
पाम ऑयल को कागजों में फर्जी खरीदारों को बेचा हुआ दिखाया गया। वहीं, दूध और घी की नकली खरीद तथा डेयरी उत्पादों की फर्जी बिक्री दर्ज की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी खरीद के नाम पर बैंक से भेजी गई रकम हवाला के जरिए नकद वापस लाई जाती थी। इस पैसे का इस्तेमाल कमीशन और दूसरे भुगतान करने में किया जाता था।
अब तक कितनी कार्रवाई हुई?
ED ने 3 जून 2026 को उत्तराखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में 16 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
इस दौरान ₹2.7 करोड़ की नकदी और बैंक बैलेंस जब्त या फ्रीज किए गए थे। मामले में ED ने विपिन जैन और कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार भी किया है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। ED ने मिलावटी घी की सप्लाई और उससे हुई कथित अवैध कमाई को लेकर ये आरोप लगाए हैं। मामले में अंतिम कानूनी फैसला आना बाकी है।

