CAFE 3 और BS 7 में क्या है अंतर? नई कार खरीदने से पहले समझें माइलेज और प्रदूषण के बदलते नियम
भारत में कारों के माइलेज और प्रदूषण से जुड़े नियम बदलने वाले हैं। CAFE 3 और BS 7 को लेकर सरकार की तैयारियों के बीच कार खरीदारों के मन में कई सवाल हैं। दोनों नियम कब लागू होंगे, इनमें क्या अंतर है और क्या नई गाड़ियां महंगी हो सकती हैं? जानें दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषित शहरों और मौजूदा कार मालिकों पर इनका क्या असर पड़ेगा।

In Short
- भारत में CAFE 3 मानक अप्रैल 2027 से लागू होंगे, जबकि BS 7 नियम अप्रैल 2029 से लागू करने का प्रस्ताव है।
- CAFE 3 का जोर गाड़ियों की औसत ईंधन खपत घटाने पर है, जबकि BS 7 हानिकारक प्रदूषण को नियंत्रित करेगा।
- नए नियमों से दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषित शहरों को लंबे समय में फायदा मिल सकता है, पुरानी BS 6 गाड़ियों को बदलना जरूरी नहीं होगा।
भारत में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है। खासकर दिल्ली-NCR, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। ऐसे में सरकार गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण और ईंधन की खपत को कम करने के लिए दो अहम नियमों पर काम कर रही है। पहला CAFE 3 और दूसरा BS 7।
दोनों नियम पर्यावरण से जुड़े हैं, लेकिन इनके मकसद अलग हैं। CAFE 3 गाड़ियों की औसत ईंधन खपत कम करने पर जोर देता है, जबकि BS 7 का मकसद गाड़ियों से निकलने वाले हानिकारक प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
CAFE 3 क्या है और कब लागू होगा?
CAFE का पूरा नाम Corporate Average Fuel Economy है। इसके तीसरे चरण के मानक 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू होने हैं।
इसके तहत कार कंपनियों को अपनी नई गाड़ियों की औसत ईंधन खपत तय सीमा के अंदर रखनी होगी। इसका मतलब यह नहीं कि हर कार का माइलेज एक जैसा होगा। बल्कि कंपनी की सभी संबंधित गाड़ियों का औसत प्रदर्शन देखा जाएगा।
इससे कंपनियां बेहतर माइलेज वाली कारों, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।
BS 7 क्या है और कब लागू होगा?
BS 7 यानी Bharat Stage 7 के तहत वाहनों से निकलने वाले हानिकारक प्रदूषण पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी है।
सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव दिया है।
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1 अप्रैल 2029: कारों और SUV के लिए नए नियम।
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1 अप्रैल 2030: छोटे मालवाहक और पिकअप वाहनों के लिए नियम।
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1 अप्रैल 2031: ट्रक और बसों के लिए नए नियमों की शुरुआत।
इसके कुछ प्रावधान अप्रैल 2035 तक लागू किए जाने का प्रस्ताव है।
BS 7 में सिर्फ इंजन से निकलने वाले धुएं की नहीं, बल्कि ब्रेक और टायर घिसने से होने वाले प्रदूषण की भी निगरानी की जाएगी।
CAFE 3 और BS 7 में क्या अंतर है?
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CAFE 3 |
BS 7 |
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1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले मानक |
1 अप्रैल 2029 से लागू करने का प्रस्ताव |
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गाड़ियों की औसत ईंधन खपत कम करना |
हानिकारक प्रदूषण कम करना |
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कंपनी की गाड़ियों का औसत प्रदर्शन देखा जाएगा |
अलग-अलग वाहनों के उत्सर्जन की जांच होगी |
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बेहतर माइलेज और कम CO2 उत्सर्जन पर जोर |
NOx और छोटे प्रदूषणकारी कणों पर नियंत्रण |
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हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक तकनीक को बढ़ावा मिल सकता है advertisement |
ब्रेक और टायर से होने वाले प्रदूषण पर भी निगरानी |
आसान उदाहरण: अगर कोई कार कम पेट्रोल खर्च करती है, तो यह CAFE 3 के मकसद से जुड़ा है। वहीं, अगर किसी कार से कम हानिकारक धुआं निकलता है, तो यह BS 7 के मकसद से जुड़ा है।
दिल्ली-NCR जैसे प्रदूषित शहरों को क्या फायदा होगा?
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषण जमीन के करीब जमा होने लगता है। ऐसे में वाहनों से निकलने वाला धुआं समस्या बढ़ा सकता है।
BS 7 से भविष्य में नई गाड़ियों का प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, CAFE 3 ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मददगार हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ इन नियमों से प्रदूषण खत्म नहीं होगा। सड़क की धूल, उद्योगों और कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण पर भी नियंत्रण जरूरी है।
नई तकनीक के कारण भविष्य में गाड़ियों की कीमत प्रभावित हो सकती है। वहीं, मौजूदा BS 6 गाड़ियों को सिर्फ BS 7 लागू होने के कारण बदलना जरूरी नहीं होगा।

