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बाइक-स्कूटर छोड़ कार खरीद रहे भारतीय, महंगी गाड़ियों का भी बढ़ा क्रेज, CIBIL की रिपोर्ट में सामने आए दिलचस्प आंकड़े

भारत में गाड़ियां खरीदने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग बाइक और स्कूटर से कार की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि कई ग्राहक ज्यादा महंगी गाड़ियां खरीदना पसंद कर रहे हैं। TransUnion CIBIL की नई रिपोर्ट में कार लोन से जुड़े दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। खास बात यह है कि गांवों में भी यह बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है।

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2026 की पहली छमाही में 37% कार लोन पहली बार खरीदने वालों ने, 31% पुराने ग्राहकों ने और 11-11% लोन बाइक से कार व महंगी कार खरीदने वालों ने लिए।
2026 की पहली छमाही में 37% कार लोन पहली बार खरीदने वालों ने, 31% पुराने ग्राहकों ने और 11-11% लोन बाइक से कार व महंगी कार खरीदने वालों ने लिए।

In Short

  • भारत में बाइक-स्कूटर से कार की ओर बढ़ रहे ग्राहक, CIBIL रिपोर्ट में सामने आया नया ट्रेंड।
  • 2026 की पहली छमाही में 37% कार लोन पहली बार कार खरीदने वालों ने लिए।
  • ग्रामीण इलाकों में बाइक से कार खरीदने वालों के लोन में सालाना 15% की बढ़ोतरी।

भारत में गाड़ियां खरीदने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। अब लोग सिर्फ अपनी पहली बाइक या कार खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पुरानी गाड़ी बदलकर नई और महंगी कारों की ओर भी बढ़ रहे हैं। TransUnion CIBIL की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में कार लोन लेने वालों में 11 फीसदी ऐसे ग्राहक थे, जो पहले दोपहिया वाहन चलाते थे और अब कार खरीद रहे हैं।

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TransUnion CIBIL की 'Shifting Gears 2026' रिपोर्ट बताती है कि देश में गाड़ियों की खरीद के साथ कार लोन लेने का तरीका भी बदल रहा है। लोग अपनी जरूरत और आमदनी के हिसाब से बेहतर गाड़ियों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे बैंक और वाहन कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

कौन खरीद रहा है कितनी कारें?

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच दिए गए पैसेंजर व्हीकल लोन में 37 फीसदी हिस्सा पहली बार कार खरीदने वालों का था। वहीं, 31 फीसदी लोन ऐसे ग्राहकों ने लिए, जो पहले भी कार के लिए लोन ले चुके थे।

इसके अलावा 11 फीसदी ग्राहक बाइक या स्कूटर से कार की ओर बढ़े, जबकि 11 फीसदी ग्राहकों ने ज्यादा महंगी कार खरीदने के लिए लोन लिया।

गांवों में भी बढ़ रहा कारों का क्रेज

रिपोर्ट में ग्रामीण भारत से भी दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। साल 2019 से गांवों में दोपहिया वाहन से कार खरीदने वाले ग्राहकों के लोन में सालाना औसतन 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कुल पैसेंजर व्हीकल लोन की सालाना वृद्धि दर 8 फीसदी रही।

कार लोन में क्रेडिट स्कोर कितना जरूरी?

रिपोर्ट बताती है कि कार लोन देते समय बैंक सिर्फ ग्राहक का क्रेडिट स्कोर नहीं देखते, बल्कि पुराने लोन की किस्तें समय पर चुकाने का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होता है।

जिन ग्राहकों ने पिछले तीन महीनों में लोन की किस्त चुकाने में देरी की थी, उनमें 4.6 फीसदी के नए कार लोन नौ महीनों के भीतर 60 दिन या उससे ज्यादा समय तक बकाया रहे। वहीं, समय पर किस्त चुकाने वालों में यह आंकड़ा 2.3 फीसदी था।

बैंक और कार कंपनियों को क्या फायदा?

रिपोर्ट के मुताबिक, बदलते ट्रेंड से बैंकों को एक ही ग्राहक को पहले बाइक, फिर कार और बाद में महंगी गाड़ी के लिए लोन देने के अवसर मिल सकते हैं।

वहीं, कार कंपनियों के लिए पहली बार कार खरीदने वालों के साथ पुरानी गाड़ी बदलने और महंगी कार खरीदने वाले ग्राहक भी महत्वपूर्ण बन रहे हैं।

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