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E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की तैयारी, माइलेज को लेकर फिर उठे सवाल

E20 पेट्रोल के बाद अब सरकार E21 और E25 की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। आने वाले सालों में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा और बढ़ सकती है। लेकिन माइलेज, पुरानी गाड़ियों और रखरखाव खर्च को लेकर कार मालिकों के सवाल अभी भी बने हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • सरकार E20 के बाद अब E21 और E25 पेट्रोल की दिशा में तैयारी कर रही है।
  • सूत्रों के मुताबिक 2027 तक E21 और 2029 तक E25 पेट्रोल लागू करने पर विचार हो रहा है।
  • सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

E20 Petrol: देश में पेट्रोल को लेकर अगला बड़ा बदलाव आने वाले सालों में देखने को मिल सकता है। E20 पेट्रोल, फ्लेक्स-फ्यूल और इथेनॉल को लेकर चल रही चर्चा के बीच अब सरकार E21 और E25 पेट्रोल पर काम कर रही है। इसका मतलब है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा आगे और बढ़ाई जा सकती है।

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E21 और E25 पर सरकार की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार आने वाले सालों में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अगर सब कुछ तय योजना के हिसाब से चला, तो 2027 तक E21 और 2029 तक E25 पेट्रोल देश में लागू किया जा सकता है।

यह बदलाव अचानक नहीं होगा। इसे धीरे-धीरे लागू करने की तैयारी है, ताकि वाहन कंपनियों और ग्राहकों दोनों को समय मिल सके। मौजूदा नीति के तहत पेट्रोल में इथेनॉल की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत तक रखने पर भी चर्चा चल रही है। यानी फिलहाल E25 सरकार की इथेनॉल मिलावट नीति की सबसे ऊपरी सीमा हो सकती है।

E20 का लक्ष्य पहले ही पूरा

सरकार ने E20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। पहले इसे 2030 तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन अब पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध है। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।

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सरकार का कहना है कि देश ने E20 का लक्ष्य तय समय से पहले पूरा कर लिया है और अब आगे बढ़ने का समय है।

माइलेज और पुरानी गाड़ियों को लेकर सवाल

सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। लेकिन वाहन मालिकों के मन में अब भी कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि माइलेज पर कितना असर पड़ेगा और पुरानी गाड़ियों को इससे कोई नुकसान होगा या नहीं।

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E20 पेट्रोल को लेकर देशभर से शिकायतें भी सामने आई हैं। कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने, पुरानी गाड़ियों के पुर्जों को नुकसान पहुंचने और रखरखाव खर्च बढ़ने की बात कही है। वहीं सरकार लगातार कह रही है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग फायदे का सौदा है।

धीरे-धीरे होगा बदलाव

सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि E20 के बाद आगे का बदलाव एक साथ नहीं किया जाएगा। इसे धीरे-धीरे लागू करने की तैयारी है। इसका मकसद यह है कि गाड़ी बनाने वाली कंपनियां को नए इंजन, सप्लाई सिस्टम और जरूरी तैयारी के लिए पूरा समय मिल सके।

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सरकार नहीं चाहती कि अचानक किसी बड़े बदलाव से वाहन कंपनियों या गाड़ी मालिकों को परेशानी हो।

सरकार का दावा क्या है?

सरकारी अनुमान के मुताबिक, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत कर रहा है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा के रूप में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की बचत भी हो रही है।

कुल मिलाकर, सरकार अब E20 के बाद E21 और E25 की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में है। 2027 और 2029 की संभावित समयसीमा के साथ योजना पर काम चल रहा है, लेकिन लोगों की चिंताएं भी बनी हुई हैं।