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कार खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर! सरकार ने बदले सेफ्टी नियम, अब गाड़ियों में क्या-क्या होगा जरूरी?

नई कार खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है। केंद्र सरकार ने वाहन सुरक्षा से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया है। इनमें दुर्घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा, कार चोरी रोकने वाली तकनीक और पैदल यात्रियों को चोट से बचाने के उपाय शामिल हैं। नए नियम अलग-अलग तारीखों से लागू होंगे। आखिर आपकी कार में क्या बदलेगा?

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आपकी कार में बढ़ेगी सुरक्षा! क्रैश टेस्ट से लेकर चोरी रोकने तक, सरकार ने बदले कई अहम नियम
आपकी कार में बढ़ेगी सुरक्षा! क्रैश टेस्ट से लेकर चोरी रोकने तक, सरकार ने बदले कई अहम नियम

In Short

  • सरकार ने कारों के क्रैश टेस्ट और सेफ्टी नियम बदले।
  • अक्टूबर 2027 से M1 कारों में इमोबिलाइज़र जरूरी होगा।
  • अक्टूबर 2028 से नए पैदल यात्री सुरक्षा मानक लागू होंगे।

भारत में कार और दूसरे वाहन चलाने वालों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क दुर्घटनाओं में यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा कम करने के लिए वाहन सुरक्षा मानकों में कई बदलाव किए गए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया है। खास बात यह है कि ये नियम एक साथ लागू नहीं होंगे, बल्कि अलग-अलग चरणों में प्रभावी होंगे।

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दुर्घटना होने पर यात्रियों की सुरक्षा पर जोर

सरकार ने नए सुरक्षा मानकों में कार के आगे और साइड से टक्कर लगने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। फ्रंटल और साइड क्रैश से जुड़े मानकों में बदलाव किए गए हैं, ताकि वाहन निर्माता बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें।

इसके अलावा पीछे से टक्कर लगने पर पेट्रोल-डीजल वाहनों की ईंधन प्रणाली और इलेक्ट्रिक वाहनों के पावरट्रेन की सुरक्षा से जुड़े मानकों को भी अपडेट किया गया है। स्टीयरिंग और वाहन नियंत्रण प्रणाली से संबंधित सुरक्षा प्रावधानों में भी संशोधन किया गया है।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी नए नियम

नए नियम केवल कार में बैठे लोगों तक सीमित नहीं हैं। सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों और अन्य असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।

अधिसूचना के मुताबिक, नए वाहन मॉडलों के लिए संशोधित पैदल यात्री सुरक्षा मानक 1 अक्टूबर 2028 से लागू होंगे।

इसके अलावा पैदल यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए फ्लेक्सिबल पेडेस्ट्रियन लेग इम्पैक्टर (FlexPLI) नाम के परीक्षण उपकरण का अनिवार्य इस्तेमाल 1 अक्टूबर 2032 से प्रस्तावित किया गया है। यह उपकरण टक्कर के दौरान पैदल यात्री के पैरों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने में मदद करता है।

कार चोरी रोकने के लिए इमोबिलाइज़र जरूरी

सरकार ने M1 श्रेणी की कारों में इमोबिलाइज़र की अनिवार्य फिटिंग के लिए 1 अक्टूबर 2027 की समयसीमा तय की है।

इमोबिलाइज़र एक इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा तकनीक है, जो सही चाबी या अधिकृत सिस्टम के बिना वाहन का इंजन स्टार्ट होने से रोकने में मदद करती है। इससे अनधिकृत तरीके से गाड़ी चालू करने का जोखिम कम हो सकता है।

हादसे की जांच में मदद करेगा EDR

संशोधित प्रावधानों में इलेक्ट्रॉनिक डेटा रिकॉर्डर (EDR) से जुड़े मानक भी शामिल किए गए हैं।

EDR दुर्घटना के आसपास वाहन की गति, ब्रेक लगाने और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी रिकॉर्ड करने में मदद कर सकता है। इससे हादसे के कारणों की जांच में उपयोगी जानकारी मिल सकती है।

कार खरीदने वालों पर क्या होगा असर?

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इन बदलावों के बाद वाहन निर्माताओं को अलग-अलग समयसीमा के अनुसार अपने मॉडलों में जरूरी तकनीकी और सुरक्षा सुधार करने होंगे। सरकार का उद्देश्य दुर्घटनाओं में चोटों का जोखिम कम करना और भारतीय वाहनों के सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाना है।

हालांकि, सभी बदलाव तुरंत लागू नहीं होंगे। इसलिए नई कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि उनके वाहन पर कौन-सा सुरक्षा नियम कब से लागू हो रहा है।