E10 पेट्रोल पर सरकार ने साफ किया रुख, जानें क्यों नहीं होगी इसकी वापसी
देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर सवाल बढ़ते जा रहे हैं। पुराने वाहन मालिक E10 का विकल्प चाहते हैं, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का असर सिर्फ पेट्रोल पंपों पर नहीं, बल्कि बड़े निवेश, बैंकों और पूरे सप्लाई सिस्टम पर पड़ सकता है।

In Short
- सरकार ने E10 पर वापस लौटने से इनकार किया, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़ी सुविधाओं में सरकारी बैंकों का हर साल करीब ₹1 लाख करोड़ का पैसा लगा है।
- विपक्ष ने 30 करोड़ से ज्यादा पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प देने की मांग उठाई है।
- सरकार के मुताबिक, देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 तीनों पेट्रोल एक साथ बेचना मुश्किल और महंगा होगा।
E10 Petrol : भारत में अब पेट्रोल पंपों पर ज्यादातर E20 पेट्रोल मिल रहा है, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। पुराने वाहनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनके लिए E10 पेट्रोल का विकल्प भी रखा जाना चाहिए। इसी मांग पर केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ किया है। लेकिन सरकार E10 पर वापस लौटने से क्यों इनकार कर रही है और इससे कितना पैसा दांव पर लग सकता है?
₹1 लाख करोड़ सालाना निवेश पर खतरा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, सरकारी बैंकों ने पिछले कई सालों में एथेनॉल बनाने और उससे जुड़ी सुविधाएं तैयार करने के लिए हर साल करीब ₹1 लाख करोड़ का कर्ज दिया है।
इस पैसे से देशभर में एथेनॉल प्लांट, डिस्टिलरी, स्टोरेज सेंटर और सप्लाई नेटवर्क तैयार किए गए हैं। ये सभी इंतजाम पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने के सरकारी लक्ष्य को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
मंत्रालय का कहना है कि अगर अचानक E10 पर वापसी होती है तो एथेनॉल बनाने की काफी क्षमता बेकार पड़ी रह सकती है। इससे किसानों, सहकारी समितियों, कारोबारियों, बैंकों और सरकारी कंपनियों के लगाए हजारों करोड़ रुपये पर असर पड़ सकता है। लेकिन आखिर पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल की मांग क्यों उठ रही है?
पुराने वाहनों को लेकर उठी E10 की मांग
E20 पेट्रोल को लेकर अब राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार देश के 30 करोड़ से ज्यादा पुराने वाहनों में भी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है, जबकि ये वाहन इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
इस नीति का विरोध करने वालों की मांग है कि अप्रैल 2023 से पहले बिके वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 का विकल्प भी रखा जाए। उनका कहना है कि इन वाहनों के मैनुअल में E10 पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। लेकिन क्या देश के हर पेट्रोल पंप पर E0, E10 और E20 तीनों तरह का पेट्रोल बेचना आसान है?
हर पेट्रोल पंप पर तीन तरह का पेट्रोल मुश्किल
मंत्रालय का कहना है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल यानी E0, E10 और E20 एक साथ बेचना आसान नहीं है।
भारत में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इन तक पेट्रोल पहुंचाने के लिए रिफाइनरी, टर्मिनल, डिपो और पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क काम करता है। अगर तीन अलग-अलग तरह का पेट्रोल सप्लाई किया जाएगा तो उन्हें रखने और पहुंचाने का खर्च बढ़ जाएगा। साथ ही स्टॉक का हिसाब रखना भी मुश्किल होगा और पूरे सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ेगा।
शुद्ध पेट्रोल अभी कुछ बड़े शहरों के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही मिलता है और इसकी कीमत ₹160 प्रति लीटर से ज्यादा हो सकती है। सरकार का कहना है कि प्रीमियम पेट्रोल कम मात्रा में बिकता है और इसके लिए पूरे देश में अलग सप्लाई सिस्टम नहीं चलाया जाता। लेकिन भारत ने E20 पेट्रोल का लक्ष्य कब हासिल किया और यह तय समय से कितना पहले पूरा हुआ?
जुलाई 2025 में हासिल हुआ E20 लक्ष्य
भारत ने जून 2022 में पेट्रोल में 10% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा किया था। इसके बाद जुलाई 2025 में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य भी हासिल कर लिया गया। सरकार ने यह काम तय समय से 5 साल पहले पूरा किया।
सरकार का कहना है कि वाहन बनाने वाली कंपनियों को इस बदलाव की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। E10 पेट्रोल को लेकर भी 2020-21 से इन कंपनियों के साथ बातचीत और सलाह की जा रही थी। पेट्रोलियम विभाग ने यह भी बताया कि ब्राजील, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिला पेट्रोल इस्तेमाल किया जा रहा है।

