आखिरी चरण में Chandrayaan-3,अंतरिक्ष यान से अलग हुआ लैंडर, 23 अगस्त को उतरेगा चांद पर

14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से निकले चंद्रयान-3 ने 5 अगस्त को चांद की पहली कक्षा में प्रवेश किया था। 6 अगस्त को पहली बार चंद्रयान की ऑर्बिट घटाकर 170 Km x 4313 Km की गई। 9 अगस्त को चंद्रयान की ऑर्बिट दूसरी बार घटाकर 174 km x 1437 km की गई।

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अंतरिक्ष यान से अलग हुआ लैंडर
अंतरिक्ष यान से अलग हुआ लैंडर

By BT बाज़ार डेस्क:

भारत के मून मिशन Chandrayaan-3 ने बुधवार को चंद्रमा की 5वीं और अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। चंद्रयान-3 अब चंद्रमा की सतह के और भी करीब पहुंच गया है। इसके साथ अंतरिक्षयान ने चंद्रमा से जुड़े अपने सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इसरो ने चंद्रयान-3 पर अपडेट देते हुए बताया कि चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर और रोवर से अलग कर दिया गया है। अब प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा की कक्षा में रहकर धरती से आने वाले रेडिएशन्स का अध्ययन करेगा जबकि लैंडर-रोवर 23 अगस्त को शाम 5:47 बजे चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे। यहां वो 14 दिन तक पानी की खोज और अन्य प्रयोग करेंगे। इसरो के मुताबिक, लैंडर और प्रोपल्शन मॉड्यूल के अलग होने के बाद शुक्रवार शाम करीब 4 बजे लैंडर को डीबूस्टिंग के जरिए निचली कक्षा में लाया जाएगा।

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इसरो सूत्रों के मुताबिक, अलग होने के बाद लैंडर की गति को कम करने के लिए डीबूस्ट किया जाएगा, ताकि उसे एक कक्षा में स्थापित किया जा सके जहां से पेरिल्यून (चंद्रमा से निकटतम बिंदु) 30 किमी और अपोल्यून (चंद्रमा से सबसे दूर का बिंदु) 100 किमी दूर है। 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश की जाएगी। 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से निकले चंद्रयान-3 ने 5 अगस्त को चांद की पहली कक्षा में प्रवेश किया था। 6 अगस्त को पहली बार चंद्रयान की ऑर्बिट घटाकर 170 Km x 4313 Km की गई। 9 अगस्त को चंद्रयान की ऑर्बिट दूसरी बार घटाकर 174 km x 1437 km की गई। 14 अगस्त को तीसरी बार इसकी ऑर्बिट घटकर 150 Km x 177 Km हो गई। इसके बाद 16 अगस्त को चंद्रयान 153 Km X 163 Km की करीब-करीब गोलाकार कक्षा में आ गया है। 23 अगस्‍त की शाम को करीब 5:47 बजे तक इसके लैंडिंग की खबर है।   

Chandrayaan-3 चंद्रमा की 5वीं और अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि इस बार हम चंद्रयान-2 वाली गलती नहीं दोहराएंगे। लैंडिंग प्रक्रिया की शुरुआत में वेग लगभग 1.68 किलोमीटर प्रति सेकंड है, लेकिन यह गति चंद्रमा की सतह के क्षैतिज है। यहां चंद्रयान-3 लगभग 90 डिग्री झुका हुआ है, इसे लंबवत करना होगा। क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर दिशा में बदलने की यह पूरी प्रक्रिया गणितीय रूप से एक बहुत ही दिलचस्प गणना है। हमने कई बार इस प्रक्रिया को दोहराया है। यहीं पर हमें चंद्रयान-2 के समय परेशानी हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि ईंधन की खपत कम हो, दूरी की गणना सही हो और सभी एल्गोरिदम ठीक हों।

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