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भारत के तेल आयात में बड़ा उलटफेर! सऊदी अरब और अमेरिका को पछाड़ ये देश बना तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर

भारत के तेल आयात में मई 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अब यह देश भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है जिसने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है।

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AI Generated Image

भारत के तेल आयात में मई 2026 में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। उसने सऊदी अरब और अमेरिका जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है।

अब भारत सबसे ज्यादा तेल सिर्फ रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से खरीद रहा है। इसके बाद तीसरे स्थान पर वेनेजुएला आ गया।

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भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से सस्ता और भारी कच्चा तेल खरीदना काफी बढ़ा दिया है। यही वजह है कि वेनेजुएला की हिस्सेदारी में अचानक से तेजी आई है।

बिजनेस टुडे ने ईटी की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि मई में भारत का कुल कच्चा तेल आयात 8% बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। हालांकि, यह आंकड़ा फरवरी के मुकाबले अभी भी कम है। फरवरी में भारत ने 52 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया था। उस समय पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध और तनाव की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी।

एनर्जी ट्रैकिंग कंपनी Kpler के अनुसार मई में वेनेजुएला ने भारत को करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई किया। अप्रैल में यह आंकड़ा 2.83 लाख बैरल प्रतिदिन था। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले करीब 9 महीने तक वेनेजुएला से भारत को लगभग कोई सप्लाई नहीं हुई थी।

 वेनेजुएला से तेल क्यों खरीद रहा है भारत?

अब सवाल यह है कि अचानक वेनेजुएला का तेल इतना महत्वपूर्ण कैसे बन गया? इसकी बड़ी वजह अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली ढील है। अमेरिका ने कुछ समय पहले वेनेजुएला पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिसके बाद वहां से तेल सप्लाई फिर शुरू हो गई।

अमेरिका का भारत को ऑफर 

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री  मार्को रुबियो ने भी भारत को खुला ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से भारत को जितनी ऊर्जा खरीदनी हो, उतनी बेचने को तैयार है। भारत दौरे से पहले मियामी में बोलते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस समय रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है।

दूसरी तरफ ईरान से तेल आयात को लेकर स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद भारत ने अप्रैल में करीब सात साल बाद ईरान से तेल खरीदना फिर शुरू किया था। लेकिन मई में कोई ईरानी तेल कार्गो भारत नहीं पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, जिसकी वजह से सप्लाई प्रभावित हुई।

युद्ध से आई तेल खरीद में गिरावट

इराक से आने वाली सप्लाई में भी भारी गिरावट देखी गई। मई में भारत को इराक से सिर्फ 51 हजार बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि फरवरी में यही आंकड़ा करीब 9.69 लाख बैरल प्रतिदिन था। इसकी बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बना तनाव और शिपमेंट में आई दिक्कतें रहीं।

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सऊदी अरब, जो ईरान युद्ध से पहले भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर था, उसकी सप्लाई भी मई में लगभग आधी रह गई। अप्रैल में जहां भारत ने सऊदी अरब से 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा था, वहीं मई में यह घटकर 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।

एक्सपर्ट का कहना है कि सऊदी तेल की ऊंची कीमतें भी इसकी एक बड़ी वजह हैं। भारतीय रिफाइनर फिलहाल सस्ते विकल्पों की तरफ ज्यादा झुक रहे हैं, और इसी का फायदा वेनेजुएला को मिला है।