कब होगी भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील! अमेरिकी राजदूत ने दिया बड़ा बयान
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड पर पिछले करीब डेढ़ साल से बात चल रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी तेज रही है।

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील पर बातचीत अब अपने आखिरी स्टेज में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने बीते 21 मई को बयान दिया कि दोनों देश ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने जा रहे हैं। यह डील आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में पूरी हो सकती है।
दिल्ली में आयोजित अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड पर पिछले करीब डेढ़ साल से बात चल रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी तेज रही है। गोर तुलना करते हुए कहा कि जहां भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा होने में करीब 19 साल लग गए। वहीं भारत और अमेरिका काफी कम समय में समझौते को पुरा कर लेंगे।
दोनों देश के लिए बिजनेस होगा आसान
गोर के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रायोरिटी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाया जाए ताकि अमेरिकी कंपनियों और कर्मचारियों को नए अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि फिलहाल एक अंतरिम व्यापार समझौता लगभग तैयार है, जो दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसरों के नए दरवाजे खोलेगा।
अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि यह समझौता सिर्फ बिजनेस बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके जरिए दोनों देशों के कारोबारियों को बाजार में ज्यादा अवसर मिलेगें। बिजनेस में आने वाली रुकावटें कम होंगी और निवेश का माहौल मजबूत होगा। अगर यह डील सही तरीके से लागू हुई, तो इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। नए निवेश आएंगे और दोनों देशों में रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों के डेलिगेशन की यात्राएं
इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत भी जारी है। पिछले महीने भारत का एक डेलिगेशन वॉशिंगटन गया था, जहां इस डील के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई। अब अगले महीने अमेरिकी डेलिगेशन भारत आने वाला है ताकि बातचीत के अगले दौर को आगे बढ़ाया जा सके।
अमेरिकी विदेश मंत्री 23 मई को आएगें भारत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी 23 मई चार दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरान व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
हालांकि, यह समझौता इतना आसान भी नहीं रहा। 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस अंतरिम व्यापार समझौते की बुनियादी रूपरेखा तय की थी। लेकिन इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पारस्परिक शुल्कों (Reciprocal Tariffs) को रद्द कर दिया। इससे दोनों देशों की बीच बातचीत थोड़ी जटिल हो गई थी।

