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13 साल की उम्र में ₹35 महीने की नौकरी, जानें कैसे फिल्मी पोस्टर बनाने वाले नाना पाटेकर बने सुपरस्टार

नाना पाटेकर की पहचान भले ही एक दमदार अभिनेता के तौर पर रही, लेकिन फिल्मों तक पहुंचने से पहले उनका जीवन संघर्षों से भरा था। परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने करीब 13 साल की उम्र में काम करना शुरू किया। कभी ₹35 महीने में फिल्मी पोस्टर बनाने वाले नाना ने बाद में थिएटर और सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

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नाना पाटेकर का सफर: ₹35 महीने की नौकरी से ऐसे बने बॉलीवुड स्टार
नाना पाटेकर का सफर: ₹35 महीने की नौकरी से ऐसे बने बॉलीवुड स्टार

In Short

  • 13 साल की उम्र में शुरू किया काम
  • ₹35 महीने में बनाते थे फिल्मी पोस्टर
  • - तीन National Film Awards किए अपने नाम

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने बेहद कम उम्र में परिवार की मदद के लिए काम करना शुरू कर दिया था। करीब 13 साल की उम्र में वह फिल्मी पोस्टर पेंट करते थे और इसके लिए उन्हें महीने के करीब ₹35 मिलते थे।

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13 साल की उम्र में शुरू किया काम

नाना पाटेकर के पिता का कारोबार बंद होने के बाद परिवार को पैसों की परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में नाना ने परिवार की मदद के लिए मुंबई में फिल्मी पोस्टर पेंट करने का काम शुरू किया।

सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने बताया था कि उन्हें करीब ₹35 महीने मिलते थे। काम पर जाने के लिए वह रोज करीब 8 किलोमीटर पैदल चलते थे। इस काम के साथ उन्हें दिन में एक समय का खाना भी मिलता था।

पेंटिंग से थिएटर तक का सफर

नाना पाटेकर ने मुंबई के समर्थ विद्यालय में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने Sir J.J. School of Art और Sir J.J. Institute of Applied Art से कला की पढ़ाई की।

Applied Art में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने Commercial Artist के तौर पर काम किया। इसके बाद वह थिएटर से जुड़े और धीरे-धीरे अभिनय की तरफ बढ़ते चले गए।

1978 में फिल्मों में रखा कदम

नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म 'Gaman' से फिल्मों में शुरुआत की। हालांकि उन्हें बड़ी पहचान मिलने में कुछ साल लगे।

Parinda, Krantiveer और Agni Sakshi जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया और इन फिल्मों के लिए उन्हें National Film Awards भी मिले। वहीं Welcome में Uday Shetty का उनका कॉमेडी किरदार भी काफी लोकप्रिय हुआ।

फिल्म डायरेक्शन में भी आजमाया हाथ

नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता ही नहीं रहे। उन्होंने 1991 में 'Prahaar: The Final Attack' से डायरेक्शन में कदम रखा। यह फिल्म सैनिकों की जिंदगी और उनकी ट्रेनिंग पर आधारित थी।

सेना के साथ उनका रिश्ता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने Military Training भी ली और 1999 के Kargil War के दौरान सैनिकों के साथ समय बिताया। उन्होंने बताया था कि उस दौरान वह Quick Reaction Team का हिस्सा भी रहे थे।

हिंदी के साथ मराठी सिनेमा में भी बनाई पहचान

हिंदी फिल्मों में सफलता मिलने के बाद भी नाना पाटेकर मराठी सिनेमा और थिएटर से जुड़े रहे। मराठी फिल्म 'Natsamrat' में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।

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Ab Tak Chhappan, Apaharan, Raajneeti, Welcome और Natsamrat जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2013 में Padma Shri से सम्मानित किया गया।

₹35 महीने में फिल्मी पोस्टर पेंट करने से लेकर National Award जीतने वाले अभिनेता बनने तक नाना पाटेकर का सफर कई मुश्किल दौर से गुजरा। अभिनेता के साथ उन्होंने डायरेक्टर, लेखक और थिएटर कलाकार के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई।