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दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाले मेघालय में सूखे जैसे हालात, मॉनसून पीक पर भी 57% कम बरसात

भारत के सबसे बारिश वाले राज्य मेघालय में इस बार मॉनसून का बदला मिजाज चिंता बढ़ा रहा है। बारिश की कमी आगे भी बनी रही तो पानी और खेती पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। जानिए आखिर मेघालय से क्यों रूठे बादल और कब सुधर सकते हैं हालात।

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AI Generated Image

In Short

  • 4 जून से 28 जुलाई के बीच मेघालय में सामान्य से 57% कम बारिश दर्ज हुई।
  • सोहरा और मासिनराम जैसे ज्यादा बारिश वाले इलाकों में भी इस बार मॉनसून कमजोर रहा।
  • बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो खेती, पीने के पानी और वाटर सोर्स पर असर पड़ सकता है।

मेघालय का नाम आते ही लगातार बारिश, बादलों से घिरी पहाड़ियां और बहते झरनों की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, 2026 का मॉनसून राज्य के लिए बिल्कुल अलग रहा है। मॉनसून अपने पीक फेज में पहुंच चुका है, लेकिन बारिश अब भी सामान्य से काफी कम है। आखिर राज्य में बारिश की स्थिति कितनी खराब है और इसके पीछे क्या वजह बताई जा रही है?

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सामान्य से 57% कम बारिश

इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी IMD के डेटा के मुताबिक, 4 जून से 28 जुलाई के बीच मेघालय में केवल 272.9 मिलीमीटर बारिश हुई। इस दौरान राज्य में सामान्य तौर पर 632.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।

इस तरह मेघालय में बारिश का डेफिसिट 57% दर्ज किया गया है। इसके कारण राज्य देश के सबसे ज्यादा बारिश की कमी वाले इलाकों में शामिल हो गया है।

सोहरा और मासिनराम में भी कम बरसात

यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है, क्योंकि मेघालय में सोहरा यानी चेरापूंजी और मासिनराम जैसे इलाके हैं। इन दोनों जगहों को दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाले स्थानों में गिना जाता है।

हालांकि, इस बार सोहरा में भी केवल हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि राज्य के कई पश्चिमी जिले ज्यादातर सूखे रहे।

पूरे नॉर्थईस्ट में बिगड़ा बैलेंस

कम बारिश केवल मेघालय तक सीमित नहीं है। IMD के ताजा स्टेट-वाइज रेनफॉल एनालिसिस के अनुसार, असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश का डेफिसिट 40-40% है। वहीं, मणिपुर में सामान्य से 42% कम बारिश हुई है।

इससे साफ है कि इस बार नॉर्थईस्ट के बड़े हिस्से में मॉनसून कमजोर बना हुआ है।

सेंट्रल इंडिया की ओर गया मॉनसून

बंगाल की खाड़ी से आया एक डीप डिप्रेशन जमीन की ओर बढ़ने के बाद मॉनसून का फोकस पश्चिम की तरफ ले गया। इससे ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नॉर्थ इंडिया के कई हिस्सों में ज्यादा मॉइस्चर पहुंचा।

दूसरी ओर, नॉर्थईस्ट लगातार भारी बारिश वाले जोन से बाहर रह गया।

सैटेलाइट इमेज में भी दिखी कमजोरी

INSAT-3DS की लेटेस्ट सैटेलाइट इमेज में सेंट्रल इंडिया और हिमालय के निचले इलाकों में घने बादल दिखाई दिए। इसके मुकाबले मेघालय के ऊपर बादल बिखरे हुए और कमजोर नजर आए।

शिलॉन्ग स्थित IMD के मेटियोरोलॉजिकल सेंटर के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के ज्यादातर हिस्सों में केवल हल्की से मध्यम बारिश हुई।

खेती और पानी पर बढ़ सकता है असर

मेघालय अपनी नदियों, झरनों और ग्राउंडवॉटर को भरने के लिए मॉनसून की बारिश पर काफी निर्भर है। बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो धान की खेती, हॉर्टिकल्चर, पीने के पानी और दूसरे वाटर सोर्स पर दबाव बढ़ सकता है।

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अगस्त में भी सूखे हालात जारी रहे तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।

आगे बारिश बढ़ने की उम्मीद

मेटियोरोलॉजिस्ट्स को उम्मीद है कि इस हफ्ते के आखिर तक हालात धीरे-धीरे सुधर सकते हैं। सेंट्रल इंडिया में एक्टिव मॉनसून सिस्टम ईस्ट और नॉर्थईस्ट की तरफ मॉनसून फ्लो को मजबूत कर सकता है।

बंगाल की खाड़ी से नया मॉइस्चर मिलने और मॉनसून ट्रफ के पूर्व की ओर खिसकने पर मेघालय में बारिश बढ़ सकती है, जिससे मौजूदा 57% सीजनल डेफिसिट कुछ कम होने की उम्मीद है।