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महाराष्ट्र में खुले तेल की बिक्री पर रोक; तुकाराम मुंढे का बड़ा एक्शन, मिलावट करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई!

महाराष्ट्र में खुले और बिना पैक किए खाने के तेल की बिक्री पर एफडीए ने बड़ा एक्शन लिया है। Commissioner तुकाराम मुंढे ने मिलावट और खराब गुणवत्ता रोकने के लिए पूरे राज्य में रोक लगा दी है। नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना और 7 साल तक जेल की कार्रवाई हो सकती है।

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In Short

  • महाराष्ट्र एफडीए ने खुले और बिना पैक तेल की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई
  • मिलावट और गलत पैकिंग करने वालों पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल का प्रावधान
  • तुकाराम मुंढे ने लोगों से केवल पैक और सुरक्षित तेल खरीदने की अपील की

महाराष्ट्र Food and Drug Administration यानी एफडीए Commissioner तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में खुले और बिना पैक किए जाने वाले खाने के तेल की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है। उन्होंने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी और दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल भी हो सकती है। यह फैसला खाने के तेल में मिलावट और खराब क्वालिटी की शिकायतों के बाद लिया गया है। यह आदेश तेल बनाने से लेकर बेचने तक पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा।

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खुले तेल की पहचान करना मुश्किल

तुकाराम मुंढे ने बताया कि खुले या बिना सील वाले तेल में बैच नंबर और सोर्स की जानकारी नहीं होती है। इसकी वजह से अगर तेल में कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। एफडीए की जांच में कई जगह बिना रजिस्ट्रेशन वाली तेल कंपनियां मिलीं और तेल में मिलावट जैसी शिकायतें भी सामने आईं।

जांच में पाया गया कि कुछ जगह सस्ते और बिना बताए गए तेलों को मिलाकर बेचा जा रहा था। इसके अलावा तेल की एसिड वैल्यू और ट्रांस फैट लिमिट से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन मिला। कुछ मामलों में पुराना तेल दोबारा पैक करके बेचने की बात भी सामने आई।

तेल बनाने वाली कंपनियों से दुकानों तक लागू होगा नियम

एफडीए का यह आदेश ऑयल एक्सपेलर यूनिट्स सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन यूनिट्स ब्लेंडिंग यूनिट्स पैकेजिंग यूनिट्स इंपोर्टर्स सुपरमार्केट ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल दुकानों सभी पर लागू होगा।ग्राउंडनट ऑयल सरसों का तेल सूरजमुखी तेल राइस ब्रान ऑयल पाम ऑयल नारियल तेल और मक्का तेल जैसे सभी प्रमुख खाने के तेल इस आदेश के दायरे में आएंगे।

महाराष्ट्र में इस समय 212 सेंट्रल लाइसेंस वाले खाने के तेल बनाने वाले उत्पादक और 285 राज्य लाइसेंस वाले ऑपरेटर हैं। एफडीए ने सभी को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

खराब पैकिंग से भी बढ़ता है खतरा

तुकाराम मुंढे ने पैकिंग को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कुछ जगह ऐसे कंटेनर इस्तेमाल किए जा रहे थे जिनमें पहले मिनरल ऑयल लुब्रिकेंट पेंट या केमिकल रखे गए थे। ऐसे कंटेनर खाने के तेल के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं और इससे तेल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि जंग लगे टूटे हुए या खराब क्वालिटी के डिब्बों में रखा तेल लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। तेल को स्टोर और ट्रांसपोर्ट करते समय उसे सीधी धूप और तेज गंध वाली चीजों से बचाना जरूरी है।

बार बार गर्म किया तेल सेहत के लिए नुकसानदायक

एफडीए Commissioner ने लोगों को बार बार गर्म किए गए तेल के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि तेल को बार बार गर्म करने से हानिकारक तत्व बन सकते हैं जो डिसलिपिडेमिया एथेरोस्क्लेरोसिस हाई ब्लड प्रेशर लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।

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नियमों के अनुसार इस्तेमाल किए गए तेल में टोटल पोलर कंपाउंड 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। वहीं नए तेल में यह स्तर 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इस्तेमाल किए गए तेल को अधिकृत कलेक्टर को देना होगा और इसे दोबारा खाने की चीजों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना और जेल

तुकाराम मुंढे ने बताया कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। असुरक्षित खाना बेचने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल हो सकती है। वहीं खराब गुणवत्ता वाले तेल पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

गलत जानकारी के साथ बेचे जाने वाले तेल पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना और बिना लाइसेंस काम करने पर 10 लाख रुपये तक की पेनल्टी लग सकती है। गलत विज्ञापन देने वालों पर भी 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कंपनी के डायरेक्टर पार्टनर और मैनेजर भी नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। एफडीए जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निलंबित करने और रद्द करने की कार्रवाई भी कर सकता है।