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भारत के पास 880 टन सोना; अमेरिका और यूरोप के मुकाबले कितना मजबूत है भारत का गोल्ड रिजर्व

भारत के पास दिसंबर 2025 तक 880 टन सोना मौजूद है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया के बड़े गोल्ड होल्डर्स में शामिल है। हालांकि अमेरिका और यूरोप के कई देशों की तुलना में भारत के कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी कम है।

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In Short

  • भारत के पास 880 टन गोल्ड रिजर्व है जो जापान के 846 टन और ऑस्ट्रेलिया के 80 टन से ज्यादा है।
  • अमेरिका के पास सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है और उसके रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी 82.4% है।
  • चीन के पास 2,306 टन सोना है लेकिन उसके कुल रिजर्व में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 8.6% है।

भारत के पास दिसंबर 2025 तक केंद्रीय बैंक के रिजर्व में 880 टन सोना मौजूद था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया के बड़े आधिकारिक गोल्ड होल्डर्स में शामिल है। हालांकि भारत के कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी कुछ बड़े देशों के मुकाबले कम है। भारत के गोल्ड रिजर्व की तुलना अमेरिका जापान चीन और यूरोपीय देशों से करने पर कई अहम बातें सामने आती हैं।

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भारत के पास जापान और ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा सोना

भारत का 880 टन का गोल्ड स्टॉक जापान के 846 टन और ऑस्ट्रेलिया के 80 टन से ज्यादा है। वहीं स्विट्जरलैंड के पास भारत से ज्यादा 1,040 टन सोना मौजूद है। भारत के कुल केंद्रीय बैंक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 17.7% है जबकि जापान में यह 8.7% और स्विट्जरलैंड में 13.6% है।

इससे पता चलता है कि किसी देश की ताकत सिर्फ उसके पास मौजूद सोने की मात्रा से तय नहीं होती बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसके कुल रिजर्व में सोने का कितना हिस्सा है।

चीन के पास भारत से दोगुने से ज्यादा गोल्ड रिजर्व

चीन भारत से काफी आगे है और उसके पास 2,306 टन सोना मौजूद है। हालांकि चीन के कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी सिर्फ 8.6% है। इसका कारण यह है कि चीन के रिजर्व में दूसरे एसेट्स यानी अन्य संपत्तियों का हिस्सा ज्यादा है।

भारत के मामले में भी सोना उसके रिजर्व पोर्टफोलियो का सिर्फ एक हिस्सा है। देश अपने विदेशी मुद्रा रिजर्व को अलग-अलग एसेट्स में रखता है जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

अमेरिका और यूरोप के देशों में सोने की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर है। उसके पास 8,133 टन सोना है और यह उसके केंद्रीय बैंक रिजर्व का 82.4% हिस्सा है। जर्मनी के पास 3,350 टन सोना है जिसकी रिजर्व में हिस्सेदारी 82.2% है।

फ्रांस के पास 2,437 टन और इटली के पास 2,452 टन सोना है। इन दोनों देशों में सोने की हिस्सेदारी क्रमशः 79.9% और 79.3% है। नीदरलैंड के पास 612 टन सोना है जो उसके कुल रिजर्व का 72.9% है।

ब्रिटेन के पास कम सोना लेकिन हिस्सेदारी भारत से ज्यादा

ब्रिटेन के पास 310 टन सोना मौजूद है। मात्रा के मामले में यह भारत से काफी कम है लेकिन उसके कुल केंद्रीय बैंक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 20.3% है। यानी ब्रिटेन अपने रिजर्व में भारत की तुलना में सोने को ज्यादा महत्व देता है।

भारत के पास ज्यादा मात्रा में सोना होने के बावजूद कुल रिजर्व बड़ा होने के कारण इसकी हिस्सेदारी 17.7% रहती है।

दुनिया के देशों की गोल्ड रणनीति अलग अलग

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हर देश अपने रिजर्व को अलग तरीके से मैनेज करता है। अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने अपने रिजर्व का बड़ा हिस्सा सोने में रखा हुआ है। वहीं भारत चीन और जापान जैसे देश विदेशी मुद्रा और दूसरे एसेट्स को भी रिजर्व का अहम हिस्सा मानते हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार भारत का 880 टन सोना उसे दुनिया के प्रमुख गोल्ड होल्डर्स में शामिल करता है। हालांकि भारत के लिए सोना कुल रिजर्व रणनीति का सिर्फ एक हिस्सा है और देश अपने आर्थिक सुरक्षा के लिए अलग अलग विकल्पों का इस्तेमाल करता है।