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Intel की नौकरी छोड़ ISRO में साइंटिस्ट बने IIT Delhi के हेमंत कुमार भुकर; हासिल की ऑल इंडिया रैंक 7

इंटेल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी करने वाले आईआईटी दिल्ली के छात्र हेमंत कुमार भुकर ने अपने सपने के लिए अलग रास्ता चुना। नौकरी के साथ तैयारी करते हुए उन्होंने इसरो साइंटिस्ट ‘ए’ चयन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की। उनकी मेहनत युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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In Short

  • आईआईटी दिल्ली के छात्र हेमंत कुमार भुकर ने इंटेल की नौकरी के साथ इसरो साइंटिस्ट ‘ए’ परीक्षा की तैयारी की और ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की।
  • 7 से 8 घंटे की नौकरी के बाद सुबह शाम और वीकेंड में पढ़ाई कर उन्होंने अपना सपना पूरा किया।
  • राजस्थान के छोटे गांव से निकलकर इसरो साइंटिस्ट बनने का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हेमंत कुमार भुकर ने एक बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़कर अपने सपने को पूरा करने का फैसला किया। इंटेल में सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में साइंटिस्ट बनने की तैयारी की और साइंटिस्ट ‘ए’ चयन प्रक्रिया में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल की। उनकी कहानी मेहनत, धैर्य और लगातार कोशिश की मिसाल बन गई है।

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आईआईटी दिल्ली से इंटेल तक पहुंचने का सफर

राजस्थान के सीकर जिले के गोठड़ा भुकड़ान गांव से आने वाले हेमंत कुमार भुकर ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और बाद में सेमीकंडक्टर में एमटेक की पढ़ाई पूरी की। उनकी मजबूत तकनीकी समझ और अच्छे प्रदर्शन की वजह से उन्हें इंटेल में डिजाइन इंजीनियर की नौकरी मिली।

इंटेल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी मिलना कई इंजीनियरों के लिए करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। हेमंत भी सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन के क्षेत्र में काम कर रहे थे और उनका करियर अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहा था।

नौकरी के साथ इसरो की तैयारी का फैसला

अच्छी नौकरी होने के बाद भी हेमंत का लक्ष्य कुछ अलग था। वह रिसर्च और भारत के स्पेस प्रोग्राम से जुड़कर काम करना चाहते थे। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी के साथ ही इसरो साइंटिस्ट ‘ए’ परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

इंटेल में रोजाना 7 से 8 घंटे की शिफ्ट करने के बाद वह सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करते थे। इसके अलावा शाम और वीकेंड का समय भी तैयारी के लिए इस्तेमाल करते थे। बिना किसी लंबे स्टडी लीव के उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की।

सेमीकंडक्टर की जानकारी ने दिलाई बढ़त

हेमंत की सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग की पढ़ाई और इंटेल में काम करने का अनुभव इसरो परीक्षा में उनके लिए काफी मददगार साबित हुआ। उन्होंने अपनी पुरानी टेक्निकल नॉलेज को ही अपनी ताकत बनाया और उसी के आधार पर तैयारी को आगे बढ़ाया।

उनकी सफलता यह बताती है कि किसी नए लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुराने अनुभव को छोड़ना नहीं पड़ता, बल्कि उसका सही इस्तेमाल करके आगे बढ़ा जा सकता है।

मेहनत और लगातार कोशिश बनी सफलता की वजह

हेमंत कुमार भुकर की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के साथ अपने बड़े सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने साबित किया कि सफलता के लिए शॉर्टकट नहीं बल्कि डिसिप्लिन, पेशेंस और लगातार मेहनत जरूरी होती है।

उनका सफर यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो करियर में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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परिवार और गांव के लिए गर्व का पल

हेमंत की सफलता उनके परिवार और गांव के लिए गर्व का मौका है। उनके पिता शिशपाल भुकर बीकानेर में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में एडिशनल चीफ इंजीनियर हैं, जबकि उनकी मां सुशीला गृहिणी हैं।

छोटे गांव से निकलकर आईआईटी दिल्ली तक पहुंचना और फिर इसरो में साइंटिस्ट बनना कई छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी कहानी दिखाती है कि सपने बड़े हों तो मेहनत के दम पर उन्हें पूरा किया जा सकता है।