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JEE में दो बार फेल हुआ युवक बना डिजाइनर, Ankur Warikoo ने बताई सफलता की कहानी

JEE में दो बार असफल होने के बाद इंदौर के एक युवक ने हार नहीं मानी और खुद से प्रोडक्ट डिजाइन सीखकर नई पहचान बनाई। अंकुर वारिकू ने उसकी कहानी साझा करते हुए बताया कि असली प्रतिभा सिर्फ बड़े कॉलेज या डिग्री से नहीं, बल्कि हुनर और मेहनत से पहचानी जाती है।

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In Short

  • इंदौर के युवक ने JEE में असफलता के बाद ऑनलाइन सीखकर बनाया करियर
  • यूट्यूब की मदद से सीखा प्रोडक्ट डिजाइन और तैयार किया पोर्टफोलियो
  • अंकुर वारिकू ने कहा डिग्री से ज्यादा जरूरी है व्यक्ति की क्षमता और हुनर

ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम यानी JEE में असफल होना अक्सर छात्रों के लिए बड़े झटके जैसा माना जाता है। लेकिन इंदौर के एक युवक ने दो बार JEE क्लियर न कर पाने के बाद अपनी राह बदल ली और एक अलग क्षेत्र में पहचान बनाई। उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस युवक की कहानी साझा की।

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वारिकू ने कहा कि भारत में समस्या प्रतिभा की कमी नहीं है, बल्कि प्रतिभा को पहचानने के तरीके की है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि युवक JEE Main या JEE Advanced में असफल हुआ था।

भारत में है प्रतिभा पहचानने की समस्या

अंकुर वारिकू ने कहा कि लोगों को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री या कंपनी के नाम से आंका जाता है। उनकी असली क्षमता और हुनर पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि लोगों को इस तरह से प्रशिक्षित किया गया है कि वे प्रतिभा को तभी पहचानते हैं, जब उसके साथ किसी बड़े कॉलेज, डिग्री या कंपनी का नाम जुड़ा हो। उनके मुताबिक, इस सोच की वजह से कई ऐसे लोग पीछे रह जाते हैं, जिनमें क्षमता तो होती है लेकिन उनके पास बड़े संस्थानों की पहचान नहीं होती।

JEE में असफलता के बाद ऑनलाइन सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के उस युवक का उदाहरण दिया, जिसने JEE में दो बार सफलता हासिल नहीं की। इसके बाद उसने खुद से प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया।

उन्होंने बताया कि युवक ने रात में पढ़ाई की और यूट्यूब की मदद से डिजाइनिंग की जरूरी स्किल हासिल की। इसके बाद उसने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया, जिसे वारिकू ने बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों से पढ़े छात्रों के पोर्टफोलियो के बराबर बताया।

वारिकू के अनुसार, यह युवक फ्रीलांस काम करता है और करीब 2 लाख रुपये प्रति महीने कमाता है। हालांकि, इस कमाई और प्रोफेशनल बैकग्राउंड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

डिग्री से ज्यादा जरूरी है हुनर

वारिकू ने कहा कि डिग्री और अनुभव किसी व्यक्ति के पिछले सफर के बारे में बताते हैं, लेकिन यह तय नहीं करते कि वह भविष्य में कितना आगे जा सकता है।

उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा शुरू हुई कि क्या सिर्फ बड़े कॉलेज ही सफलता का रास्ता तय करते हैं। कुछ लोगों ने कहा कि यह उदाहरण दिखाता है कि पोर्टफोलियो, प्रैक्टिकल स्किल और खुद से सीखने की क्षमता भी आज के समय में काफी अहम है।

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ऑनलाइन सीखने से खुले नए रास्ते

ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म ने युवाओं के लिए बिना पारंपरिक डिग्री के भी नई स्किल सीखने के रास्ते खोले हैं। इससे प्रोडक्ट डिजाइन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल सर्विस जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के नए मौके सामने आए हैं।

अंकुर वारिकू ने अपनी पढ़ाई से जुड़े संघर्षों के बारे में भी बात की है। उन्होंने बताया है कि वह भी 18 साल की उम्र में JEE क्लियर नहीं कर पाए थे और बाद में उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी।