BT India@100: भारत बन सकता है ग्लोबल फैक्ट्री? लेकिन एक बदलाव के बिना मुश्किल होगी राह
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए ट्रेड बैरियर कम करने की जरूरत है। पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि आयात को आसान बनाना जरूरी है, क्योंकि बेहतर एक्सपोर्ट के लिए वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ना होगा। उन्होंने वियतनाम का उदाहरण देते हुए भारत की रणनीति पर बात की।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट पावरहाउस बनने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को और खोलने की जरूरत है। पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि अगर भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी है तो उसे आयात पर लगी पाबंदियों को कम करना होगा।
Business Today India@100 कार्यक्रम में बोलते हुए जयंत सिन्हा ने कहा कि भारत के इंपोर्ट टैरिफ करीब 15 फीसदी हैं, जबकि वियतनाम जैसे एक्सपोर्ट आधारित देशों में यह लगभग 1 फीसदी है।
आयात आसान होगा तभी बढ़ेगा निर्यात
जयंत सिन्हा ने कहा कि कंपनियों को ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ने के लिए जरूरी सामान, टेक्नोलॉजी और कंपोनेंट आसानी से मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर भारत स्वतंत्र रूप से आयात नहीं कर पाएगा तो उसके लिए बड़े स्तर पर निर्यात करना भी मुश्किल होगा। उनके मुताबिक, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए व्यापार को और ज्यादा खुला बनाना जरूरी है।
वियतनाम से क्यों हो रही भारत की तुलना?
सिन्हा ने वियतनाम का उदाहरण देते हुए कहा कि इस देश ने ट्रेड ओपननेस के जरिए खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क से मजबूती से जोड़ा है।
उन्होंने बताया कि वियतनाम का एक्सपोर्ट उसके जीडीपी का करीब 90 फीसदी है, जबकि भारत का एक्सपोर्ट लगभग 20 फीसदी है। वहीं वियतनाम में एफडीआई करीब 4 से 4.5 फीसदी जीडीपी के बराबर है, जबकि भारत में यह लगभग 1 फीसदी है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल निवेशक अब भारत की तुलना वियतनाम और चीन जैसे देशों से कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और तेजी से क्यों नहीं जुड़ रहा है।
सेक्टर के हिसाब से खोलनी होगी अर्थव्यवस्था
जयंत सिन्हा ने माना कि ट्रेड पॉलिसी अब पहले से ज्यादा जटिल हो गई है। इसमें सिर्फ आर्थिक मुद्दे नहीं बल्कि जियोपॉलिटिक्स, नेशनल सिक्योरिटी और सप्लाई चेन से जुड़े विषय भी शामिल हैं।
उन्होंने रूस से तेल खरीद और चीन से जुड़े क्रिटिकल मिनरल्स जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार व्यापार से जुड़े फैसलों पर दूसरे रणनीतिक मुद्दों का असर पड़ता है।
इसके बावजूद उन्होंने कहा कि भारत को जहां संभव हो वहां धीरे-धीरे ट्रेड बैरियर कम करने चाहिए और सेक्टर के हिसाब से अर्थव्यवस्था को खोलना चाहिए।
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग से मिली बड़ी सीख
सिन्हा ने भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को एक सफल उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में भारत दुनिया के बड़े स्मार्टफोन एक्सपोर्टर्स में शामिल हो गया है और बड़ी संख्या में आईफोन अब भारत में बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सही नीतियों के साथ भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
ट्रेड एग्रीमेंट से मिलेगी रफ्तार
जयंत सिन्हा ने अंतरराष्ट्रीय ट्रेड एग्रीमेंट में ज्यादा भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते भारत को धीरे-धीरे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने में मदद कर सकते हैं।
उनके मुताबिक, भारत के लिए चीन प्लस वन रणनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़े अवसर मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए व्यापार को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

