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अमेरिका में भारतीय महिला के बयान से मचा बवाल, बोलीं- अपने रेस्टोरेंट में भारतीयों को नौकरी नहीं देती

अमेरिका में एक भारतीय मूल की महिला उद्यमी का बयान सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया है। उनकी हायरिंग पॉलिसी को लेकर लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं। कुछ इसे सही ठहरा रहे हैं, तो कुछ गंभीर सवाल उठा रहे हैं। आखिर ऐसा क्या कहा गया जिसने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी? जानिए पूरी कहानी।

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भट ने यह भी बताया कि कुछ कर्मचारियों ने रेस्टोरेंट में शामिल होने से पहले कभी भारतीय भोजन का स्वाद नहीं चखा था।
भारतीय रेस्टोरेंट की मालकिन बोलीं, भारतीयों को नौकरी नहीं देती

टेक्सास के छोटे से शहर न्यू ब्रौनफेल्स में स्थित '7 मोंक कैफे' इन दिनों अपने खाने से ज्यादा अपनी ओनर रश्मि भट की एक पोस्ट की वजह से चर्चा में है। मुंबई में जन्मीं रश्मि ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा मैं अपने इंडियन रेस्टोरेंट में भारतीयों को नौकरी पर नहीं रखती।

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उनके इस बयान के बाद यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। रश्मि अपनी मां के साथ मिलकर इस रेस्टोरेंट को चलाती हैं। वह बताती हैं कि हमने साल 2019 में यह बिजनेस शुरू किया था। लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही।

रेस्टोरेंट खुलने के कुछ ही समय बाद कोविड-19 महामारी आ गई, जिसने दुनियाभर के रेस्टोरेंट कारोबार को झटका दिया। तमाम चुनौतियों के बावजूद 7 मोंक कैफे ने खुद को संभाला और धीरे-धीरे लोकल कस्टमर के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई।

नेशनलिटी को नहीं बनाया हायरिंग का आधार

अपने वीडियो पोस्ट में रश्मि कहती हैं कि उनका यह फैसला अक्सर लोगों को चौंका देता है। जब लोग किसी इंडियन रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो वे यह मानकर चलते हैं कि वहां काम करने वाले सभी स्टाफ मेंबर इंडियन ही होंगे। लेकिन मैंने कभी हायरिंग का आधार नेशनलिटी को नहीं बनाया।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Rashmi Bhat (@toastyindian)

रश्मि बताती हैं कि जब उन्होंने रेस्टोरेंट शुरू किया, तब उनका टारगेट इंडियन स्टाफ रखना नहीं था, बल्कि ऐसी टीम तैयार करना था जो मेहनती हो, भरोसेमंद हो और सीखने के लिए तैयार हो। इसी सोच के साथ उन्होंने हाई स्कूल और कॉलेज स्टूडेंट, सिंगल मदर और रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत की तलाश कर रहे लोगों को मौका दिया।

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स्टाफ में लोकल लोगों को किया हायर

उनके मुताबिक टीम के कई सदस्य ऐसे थे जिन्होंने यहां नौकरी शुरू करने से पहले कभी भारतीय खाना तक नहीं चखा था। लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय खानों को समझा और वे उनके पसंदीदा पकवान बन गए। आज वे कस्टमर को पूरे आत्मविश्वास के साथ मेन्यू में अपने पसंदीदा पकवानों की सलाह देते हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

रश्मि की इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी। कई लोगों ने उनकी सोच का समर्थन किया और कहा कि किसी भी नौकरी में सबसे महत्वपूर्ण होती है व्यक्ति की योग्यता और काम के प्रति उसका रवैया। न कि उसकी नेशनलिटी और कल्चर।

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वहीं  कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया। एक यूजर ने लिखा, आप एक अच्छी टीम बनाना चाहती हैं, लेकिन भारतीयों को नौकरी न देकर आप एक खास समुदाय के खिलाफ भेदभाव कर रही हैं। एक अन्य यूजर ने लिखा आप भारतीय लोगों को नहीं रखना चाहतीं, लेकिन चाहती हैं कि  इंडियन कस्टमर आपके रेस्टोरेंट में आएं। जो असली भारतीय खाना बनाने और उसकी कल्चर को समझने में बेहतर मदद कर सकते हैं।

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एक अन्य यूजर ने लिखा, भारतीय खाने को भारतीयों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। अगर आपके यहां भारतीय शेफ नहीं हैं, तो क्या खाना वास्तव में उतना ही ऑथेंटिक है जितना आप दावा कर रही हैं? या फिर यह सिर्फ एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी है, जिसने आपको वायरल कर दिया?