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रूस और मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने पहले से जुटाना शुरू किया कच्चा तेल, सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता

रूस से घटती क्रूड सप्लाई, होर्मुज स्ट्रेट पर संकट और संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने महीनों पहले कच्चे तेल की खरीद शुरू कर दी है। इंडियन ऑयल और HPCL जैसी कंपनियां अक्टूबर-नवंबर तक की जरूरत सुरक्षित करने में जुटी हैं ताकि सप्लाई में किसी भी रुकावट का असर कम हो।

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AI Generated Image

In Short

  • रूस से तेल सप्लाई घटने और होर्मुज संकट के कारण भारतीय रिफाइनरियां पहले से क्रूड खरीद रही हैं।
  • HPCL ने अक्टूबर डिलीवरी के लिए करीब 4 मिलियन बैरल मिडिल ईस्ट क्रूड बुक किया है।
  • फेस्टिव सीजन और बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता के चलते भारत में कच्चे तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

यूक्रेन के हमलों और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता के बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियां अब कच्चे तेल की खरीद पहले से ज्यादा समय के लिए करने लगी हैं। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑयल इंपोर्टर भारत में रिफाइनरियां अक्टूबर और नवंबर तक की सप्लाई सुरक्षित करने में जुट गई हैं। आमतौर पर कंपनियां सिर्फ एक-दो महीने पहले ही स्पॉट क्रूड खरीदती हैं, लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं और कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं।

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रूस से घटती सप्लाई और होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय रिफाइनरियों की इस तेज खरीद के पीछे सबसे बड़ी वजह रूस से आने वाले कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है। हाल के महीनों में रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया है और सरकारी तेल कंपनियों की कुल खरीद में रूस की हिस्सेदारी करीब आधी रही है।

लेकिन यूक्रेन की ओर से रूस के एनर्जी एसेट्स और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों के बाद वहां से आने वाला तेल मई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसी वजह से भारतीय कंपनियां अब दूसरे विकल्प तलाश रही हैं।

अक्टूबर तक की सप्लाई पहले ही बुक कर रही कंपनियां

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और दूसरी सरकारी रिफाइनरियां अब अक्टूबर और नवंबर के लिए पहले से क्रूड कार्गो खरीद रही हैं। आमतौर पर ये कंपनियां स्पॉट सप्लाई के लिए सिर्फ एक या दो महीने पहले ऑर्डर देती थीं।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अक्टूबर डिलीवरी के लिए करीब 4 मिलियन बैरल मिडिल ईस्ट क्रूड खरीदा है, जिसे होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। वहीं मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने अक्टूबर के लिए वेस्ट अफ्रीका से आने वाला तेल बुक किया है। इंडियन ऑयल भी अक्टूबर सप्लाई के लिए खरीदारी कर रही है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी हुई है अनिश्चितता

मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल की सप्लाई भी सामान्य स्तर से काफी नीचे है। अमेरिका और ईरान के बीच पीस टॉक में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है और होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह खुलने को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते मतभेदों ने किसी समझौते की उम्मीद कम कर दी है। शुक्रवार को ईरान की ओर से यूएई के दो जहाजों पर हमले के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

रूस पर प्रतिबंधों का डर भी बढ़ा रहा खरीदारी

भारतीय कंपनियां रूस के तेल पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भी सतर्क हैं। अमेरिका में रूस के एनर्जी खरीदारों पर ज्यादा टैरिफ लगाने से जुड़ा कानून सीनेट से पास हो चुका है, हालांकि अभी यह लागू नहीं हुआ है।

भारत ने इस मामले में कहा है कि यह अमेरिका का आंतरिक मामला है। लेकिन भविष्य में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए कंपनियां पहले से ज्यादा क्रूड स्टॉक सुरक्षित कर रही हैं।

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भारत की बढ़ती मांग के बीच बढ़ेगी जरूरत

भारत की सरकारी रिफाइनरियां अपनी करीब आधी क्रूड जरूरत टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए पूरी करती हैं। मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के प्रमुख तेल उत्पादक देशों के करीब होने की वजह से उन्हें पहले लंबे समय के लिए स्पॉट खरीद करने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

लेकिन अब सप्लाई में जोखिम बढ़ गया है। सितंबर से भारत में फेस्टिव सीजन शुरू होगा, जिससे ईंधन की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा इस साल रिफाइनिंग क्षमता में 5 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा की बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे कंपनियों को और ज्यादा कच्चे तेल की जरूरत पड़ेगी।