scorecardresearch

विजय माल्या-SBI विवाद पर कोर्ट सख्त, ₹15,000 करोड़ की रिकवरी के बाद अब ED से मांगा पूरा हिसाब

विजय माल्या और बैंकों के बीच ₹15,000 करोड़ की रिकवरी का मामला अब आखिरी दौर में पहुंचता दिख रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ED से पूछा है कि क्या सेटलमेंट और एसेट रिकवरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद को अब खत्म करना चाहिए।

Advertisement

In Short

  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या और SBI-led बैंकों के बीच चल रहे विवाद को खत्म करने के संकेत दिए।
  • माल्या के वकील ने दावा किया कि बैंकों ने करीब ₹15,000 करोड़ की रिकवरी कर ली है।
  • कोर्ट ने साफ किया कि कमर्शियल विवाद खत्म होने के बावजूद क्रिमिनल केस जारी रहेंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI की अगुवाई वाले बैंकों के समूह के बीच चल रहे लंबे कानूनी विवाद पर जल्द फैसला लेने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले को अब खत्म करने की जरूरत है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आपसी संबंधों पर इसका असर न पड़े। यह मामला माल्या की संपत्तियों से बैंकों की ₹15,000 करोड़ रिकवरी और उससे जुड़े कानूनी विवाद से जुड़ा है। अब कोर्ट का पूरा फोकस इस बात पर है कि क्या रिकवरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या नहीं।

advertisement

बॉम्बे HC ने ED से मांगा जवाब

विजय माल्या की ओर से दाखिल 2020 की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जानकारी मांगी है। माल्या ने अपनी याचिका में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ED द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह को कर्ज वसूलने के लिए करने की अनुमति दी गई थी।

माल्या के वकील अमित देसाई ने कोर्ट में कहा कि जब यह याचिका दाखिल की गई थी, तब बैंकों के साथ सेटलमेंट की बातचीत चल रही थी। लेकिन पिछले छह साल में हालात बदल चुके हैं और याचिका में शामिल ज्यादातर संपत्तियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा कि इस मामले को अब खत्म किया जाना चाहिए। कोर्ट ने ED से एफिडेविट दाखिल कर यह बताने को कहा है कि सेटलमेंट और एसेट रिकवरी की प्रक्रिया पूरी हुई है या नहीं।

माल्या का दावा- बैंकों ने वसूले ₹15,000 करोड़

सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा बैंकों द्वारा की गई रिकवरी का रहा। माल्या के वकील ने दावा किया कि सरकारी बैंकों ने करीब ₹15,000 करोड़ की वसूली कर ली है, जबकि बैंकों का शुरुआती दावा ₹6,203.35 करोड़ का था, जिसमें ब्याज शामिल नहीं था।

वकील ने कहा कि बैंकों ने इतनी बड़ी रकम हासिल कर ली है और फिर भी मामला लंबित रखना सही नहीं है। हालांकि, रिकवरी की रकम, ब्याज और कुल देनदारी का हिसाब अभी भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

कैसे शुरू हुआ था एसेट रिकवरी का मामला

यह पूरा मामला किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए लोन और उसके बाद हुई कार्रवाई से जुड़ा है। फरवरी 2019 में ED ने स्पेशल PMLA कोर्ट में कहा था कि उसे SBI की अगुवाई वाले बैंकों के समूह द्वारा जब्त संपत्तियों को बेचकर बकाया रकम वसूलने पर कोई आपत्ति नहीं है।

इससे पहले जनवरी 2019 में विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। इसके बाद बैंकों को उसकी संपत्तियों से रिकवरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिली थी।

आपराधिक मामले अपनी जगह जारी रहेंगे

बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अगर बैंकों और माल्या के बीच कमर्शियल विवाद खत्म भी होता है, तो इसका असर आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि माल्या के खिलाफ चल रही क्रिमिनल कार्रवाई को अपने अंतिम नतीजे तक पहुंचना होगा।

advertisement

विजय माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। उनके खिलाफ किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए लोन में कथित गड़बड़ी, फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामले चल रहे हैं।

ब्रिटेन की अदालतें उनके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं, लेकिन वहां चल रही अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के कारण उनकी वापसी अभी तक नहीं हो पाई है। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही मौजूदा सुनवाई सिर्फ संपत्तियों से रिकवरी और बैंकों के विवाद से जुड़ी है।