
प्याज 43% महंगा, LPG के दाम बढ़े... जानिए आपकी थाली पर कितना पड़ा असर
महंगाई का असर अब घर की थाली पर भी दिख रहा है। CRISIL रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में नॉन-वेज थाली की लागत 5% बढ़ी, जबकि वेज थाली 1% महंगी हुई। प्याज, LPG और तेल की बढ़ती कीमतों ने खर्च बढ़ाया, वहीं आलू और टमाटर की गिरती कीमतों से थोड़ी राहत मिली।

In Short
- अगस्त में घर की नॉन-वेज थाली की लागत 5% बढ़कर ₹57.5 हुई, जबकि वेज थाली 1% महंगी होकर ₹29.5 पहुंची।
- प्याज, LPG और वेजिटेबल ऑयल की बढ़ी कीमतों ने थाली का खर्च बढ़ाया, प्याज सालाना 43% महंगा हुआ।
- आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट ने बढ़ती थाली लागत को कुछ हद तक नियंत्रित किया।
घर में बनने वाली शाकाहारी थाली की लागत अगस्त में सालाना आधार पर 1% बढ़कर 29.5 रुपये हो गई है। CRISIL Intelligence की रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, वेजिटेबल ऑयल, चावल और LPG की बढ़ी कीमतों ने थाली के खर्च को बढ़ाया है।
हालांकि, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट से बढ़ोतरी को कुछ राहत मिली। रिपोर्ट के अनुसार, महीने-दर-महीने आधार पर भी वेज थाली की लागत में 1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
नॉन-वेज थाली हुई 5% महंगी
रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-वेज थाली की लागत में सालाना आधार पर ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली। अगस्त में घर पर तैयार होने वाली नॉन-वेज थाली की लागत 5% बढ़कर 57.5 रुपये हो गई।
इसकी बड़ी वजह चिकन यानी ब्रॉयलर की बढ़ी कीमतें रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में सालाना आधार पर करीब 10% की बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा असर नॉन-वेज थाली की लागत पर पड़ा।
हालांकि, महीने के आधार पर नॉन-वेज थाली की लागत में 1% की गिरावट आई। श्रावण महीने में मांग कमजोर रहने से ब्रॉयलर की कीमतों में करीब 4% की कमी आई, जिससे लागत थोड़ी कम हुई।
अगस्त में प्याज हुआ 43% महंगा
CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43% बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जो पिछले साल 28 रुपये प्रति किलो थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से आने वाली फसल और भंडारण को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा रबी उत्पादन में 5-6% की गिरावट से भी प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई।
तेल और LPG की कीमतों में भी बढ़ोतरी
वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में सालाना आधार पर 11% और LPG सिलेंडर की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, सप्लाई में दिक्कत और पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर देखने को मिला।

वहीं, आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट ने थाली की लागत को कुछ नियंत्रित किया। आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 12% और टमाटर की कीमतों में 28% की कमी आई।
CRISIL ने ऐसे की थाली की गणना
CRISIL की गणना के मुताबिक, शाकाहारी थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर, आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल हैं। वहीं नॉन-वेज थाली में दाल की जगह ब्रॉयलर चिकन शामिल किया जाता है।
रिपोर्ट में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में सामान की कीमतों के आधार पर घर में थाली तैयार करने की औसत लागत निकाली गई है। इसमें अनाज, दाल, चिकन, सब्जियां, मसाले, खाने का तेल और गैस जैसी चीजों की कीमतों के असर को शामिल किया गया है।

