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AI डेटा सेंटर पर अरबों डॉलर लगा रहा भारत, लेकिन सबसे ज्यादा नौकरियां कहीं और बन सकती हैं

भारत में AI डेटा सेंटर पर अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है, लेकिन इन परियोजनाओं में स्थायी नौकरियां सीमित रह सकती हैं। रोजगार का बड़ा मौका निर्माण, क्लाउड, साइबर सुरक्षा, बिजली, कूलिंग और AI सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में बन सकता है। असली असर डेटा सेंटर के बाहर ज्यादा दिख सकता है।

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In Short

  • भारत में AI डेटा सेंटर पर अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है, लेकिन इनमें स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित रह सकती है।
  • रोजगार के बड़े मौके क्लाउड, साइबर सुरक्षा, बिजली, कूलिंग, नेटवर्क और AI सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में बन सकते हैं।
  • भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ने से इंजीनियरों, तकनीशियनों, स्टार्टअप और डिजिटल कारोबार के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

भारत तेजी से कृत्रिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)  के लिए जरूरी डिजिटल ढांचा तैयार कर रहा है। गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में डेटा सेंटर पर अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है। लेकिन इतने बड़े निवेश के बावजूद सबसे ज्यादा नौकरियां डेटा सेंटर के अंदर नहीं, बल्कि उसके आसपास बनने वाले पूरे तकनीकी तंत्र में पैदा हो सकती हैं।

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जेएम फाइनेंशियल का अनुमान है कि 2030 तक भारत को करीब 5 गीगावॉट डेटा सेंटर क्षमता की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए करीब 20 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश चाहिए होगा। सर्वर जैसी क्लाउड बुनियादी सुविधाओं पर अलग से करीब 60 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है।

डेटा सेंटर नहीं हैं बड़े रोजगार देने वाले कारखाने

डेटा सेंटर बनाने में हजारों करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं, लेकिन चालू होने के बाद इनमें सीमित स्थायी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा के मुताबिक, इन्हें बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाली परियोजनाओं के बजाय रणनीतिक डिजिटल ढांचे के रूप में देखना चाहिए।उनका कहना है कि अत्यधिक स्वचालित 100 मेगावॉट के डेटा सेंटर में केवल 20 से 30 स्थायी कर्मचारी भी पर्याप्त हो सकते हैं। हालांकि निर्माण के दौरान मजदूरों, इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की मांग काफी ज्यादा रहती है।

 गूगल परियोजना से समझें रोजगार का गणित

विशाखापत्तनम में गूगल की प्रस्तावित 1 गीगावॉट AI डेटा सेंटर परियोजना पर पांच साल में करीब 15 अरब डॉलर निवेश की योजना है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, इससे 5,000 से 6,000 प्रत्यक्ष और कुल 20,000 से 30,000 रोजगार बनने की उम्मीद है।

आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने बाद में इससे करीब दो लाख रोजगार तक बनने की संभावना जताई। यह संख्या केवल डेटा सेंटर के कर्मचारियों की नहीं, बल्कि AI, क्लाउड, साइबर सुरक्षा, बिजली, नेटवर्क और दूसरी सेवाओं से बनने वाले व्यापक रोजगार को दिखाती है।

असली अवसर डेटा सेंटर के बाहर

डॉ. शर्मा के मुताबिक, क्लाउड आर्किटेक्ट, AI इंजीनियर, डेटा इंजीनियर, साइबर सुरक्षा पेशेवर, सेमीकंडक्टर तकनीशियन और आईटी एकीकरण से जुड़े काम बढ़ सकते हैं। फिनटेक, स्वास्थ्य तकनीक, कृषि तकनीक और ई-कॉमर्स कंपनियां भी इस क्षमता का फायदा उठा सकती हैं।हालांकि सिर्फ डेटा सेंटर बन जाने से नौकरियां अपने आप पैदा नहीं होंगी। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारी, सस्ती कंप्यूटिंग क्षमता, शोध संस्थान, स्टार्टअप वित्त और मजबूत डिजिटल मांग भी जरूरी होगी।