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न्यूक्लियर पावर से दौड़ेंगे कार्गो शिप? अमेरिका की तैयारी तेज, चीन की बढ़ सकती है टेंशन

अमेरिका अब न्यूक्लियर पावर को कमर्शियल शिपिंग में लाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। US Maritime Administration ने CORE POWER के साथ मिलकर SMR से चलने वाले कार्गो जहाजों की संभावनाएं तलाशनी शुरू की हैं। हालांकि तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती रेगुलेशन, पोर्ट एक्सेस, इंश्योरेंस और फाइनेंसिंग की है।

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In Short

  • अमेरिका SMR से चलने वाले कमर्शियल कार्गो जहाजों की योजना पर काम कर रहा है
  • न्यूक्लियर जहाज ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं और रिफ्यूलिंग की जरूरत कम हो सकती है
  • रेगुलेशन, पोर्ट एक्सेस, क्रू ट्रेनिंग और इंश्योरेंस सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं

दशकों से समुद्र में न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल मुख्य रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर, सबमरीन और आइसब्रेकर जहाजों में होता रहा है। अब अमेरिका इस तकनीक को कमर्शियल शिपिंग में लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में US Maritime Administration यानी MARAD ने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी डेवलपर CORE POWER के साथ समझौता किया है।

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इसका मकसद यह देखना है कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर यानी SMR से चलने वाले US-फ्लैग्ड कार्गो जहाजों को किस तरह हकीकत में उतारा जा सकता है।

अभी सेवा शुरू नहीं होगी

यह समझौता इस बात का संकेत नहीं है कि न्यूक्लियर कार्गो जहाज जल्द समुद्र में उतरने वाले हैं। फिलहाल जोर उन बड़ी चुनौतियों पर है जो ऐसी तकनीक को कमर्शियल इस्तेमाल में लाने से पहले हल करनी होंगी।

इनमें रेगुलेटरी मंजूरी, न्यूक्लियर सेफ्टी, पोर्ट एक्सेस, क्रू ट्रेनिंग, न्यूक्लियर फ्यूल सप्लाई, रिएक्टर मेंटेनेंस, इंश्योरेंस, लायबिलिटी और फाइनेंसिंग जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अमेरिका को न्यूक्लियर कार्गो शिप क्यों चाहिए?

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी तक बिना बार-बार ईंधन भराए सफर करने की क्षमता हो सकती है। सामान्य कार्गो जहाज बड़ी मात्रा में फ्यूल लेकर चलते हैं और यात्रा के दौरान लगातार उसका इस्तेमाल करते हैं।

न्यूक्लियर रिएक्टर से चलने वाले जहाज में कम जगह में बहुत ज्यादा ऊर्जा पैदा की जा सकती है। इससे फ्यूल स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह बच सकती है और रिफ्यूलिंग की जरूरत भी कम हो सकती है।

US Transportation Secretary Sean Duffy का दावा है कि ऐसे जहाज ज्यादा कार्गो ले जा सकते हैं, क्रॉसिंग टाइम 75 फीसदी तक घटा सकते हैं और 20 साल तक बिना रिफ्यूलिंग के चल सकते हैं। उन्होंने 2028 तक पहला न्यूक्लियर पावर्ड जहाज बनने की बात भी कही है।

SMR क्या है?

SMR एक कॉम्पैक्ट न्यूक्लियर रिएक्टर होता है, जिसे पारंपरिक न्यूक्लियर प्लांट से छोटे स्तर पर बिजली या गर्मी पैदा करने के लिए डिजाइन किया जाता है।

शिपिंग में यह डीजल या दूसरे मरीन फ्यूल की जगह न्यूक्लियर फिशन से गर्मी पैदा कर सकता है। इस गर्मी से स्टीम बनाकर टर्बाइन चलाई जा सकती हैं और जहाज को आगे बढ़ाने के लिए पावर पैदा की जा सकती है।

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तकनीक पुरानी है, चुनौती कमर्शियल इस्तेमाल की

न्यूक्लियर पावर्ड जहाज कोई नई तकनीक नहीं हैं। सैन्य जहाज, सबमरीन और एयरक्राफ्ट कैरियर दशकों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। रूस भी न्यूक्लियर आइसब्रेकर चलाता है।

मुश्किल यह है कि कमर्शियल जहाजों को दुनिया भर के पोर्ट, रेगुलेटर, इंश्योरर, शिप ओनर और कार्गो ऑपरेटर के नियमों के साथ काम करना पड़ता है।

उत्सर्जन घटेगा लेकिन चुनौतियां रहेंगी

न्यूक्लियर प्रोपल्शन से जहाज चलाते समय सीधे कार्बन उत्सर्जन को काफी कम किया जा सकता है क्योंकि इसमें फॉसिल फ्यूल नहीं जलता। हालांकि न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल, रिएक्टर निर्माण, रेडियोएक्टिव वेस्ट और डीकमीशनिंग से जुड़ी पर्यावरण और सुरक्षा की चुनौतियां बनी रहेंगी।

चीन भी है बड़ी वजह

अमेरिका इस योजना को सिर्फ उत्सर्जन या फ्यूल लागत तक सीमित नहीं देख रहा है। Sean Duffy ने इसे चीन के साथ समुद्री प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा है। चीन ग्लोबल कमर्शियल शिपबिल्डिंग में बड़ी ताकत बन चुका है, जबकि अमेरिका इस सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। ऐसे में न्यूक्लियर कार्गो जहाज उसकी व्यापक समुद्री रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

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