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भारत की GDP और नौकरियों पर पड़ सकता है बढ़ती गर्मी का असर - जानें कैसे

भारत में 2026 की भीषण गर्मी अब अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। बढ़ते तापमान से जीडीपी, नौकरियों और बिजली आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। एसी की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे ‘कूलिंग ट्रैप’ का खतरा भी गहराता जा रहा है।

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भारत की 2026 की झुलसा देने वाली गर्मी अब सिर्फ मौसम की खबर नहीं रही, बल्कि यह अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा टेस्ट बनती जा रही है। भारत के उत्तर और मध्य हिस्सों- राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तापमान लगातार 45°C से ऊपर पहुंच रहा है, जबकि कई जगह 47°C के करीब दर्ज हुआ। यह ट्रेंड दिखाता है कि क्लाइमेट चेंज के चलते दक्षिण एशिया में हीटवेव अब ज्यादा लंबी, जल्दी और तीव्र होती जा रही हैं।

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अर्थव्यवस्था पर सीधा असर

बिजनेस टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक प्रोडक्ट ग्रोथ लीडर आकाश गुप्ता ने इस मुद्दे को आर्थिक नजरिए से उठाया है। McKinsey & Company, International Labour Organization, International Monetary Fund और The Lancet के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि:

  • भारत को 2030 तक हर साल GDP का 2.5% से 4.5% तक नुकसान हो सकता है।
  • हर साल 150 से 250 अरब डॉलर की आर्थिक क्षति का अनुमान है।
  • करीब 3.4 करोड़ फुल-टाइम नौकरियां हीट एक्सपोजर से प्रभावित हो सकती हैं।

यह आंकड़े इस धारणा को चुनौती देते हैं कि भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ बिना रुकावट जारी रहेगी।

बढ़ती कूलिंग डिमांड, बढ़ता दबाव

गर्मी बढ़ने के साथ AC की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इससे बिजली संकट गहरा सकता है। अभी केवल 8% भारतीय घरों में AC है, जबकि 2035 तक 13-15 करोड़ नए AC जुड़ने का अनुमान है।

पीक बिजली मांग 2024 में 240 GW तक पहुंच चुकी है। University of California Berkeley के मुताबिक, सिर्फ रूम AC ही 2035 तक 180 GW अतिरिक्त मांग जोड़ सकते हैं। वहीं Central Electricity Authority ने 2028 तक 26 GW की कमी का अनुमान जताया है।

‘कूलिंग ट्रैप’ का खतरा

भारत की बिजली व्यवस्था अभी करीब 70% कोयले पर निर्भर है। ऐसे में एक खतरनाक चक्र बन रहा है- ज्यादा गर्मी से AC की मांग बढ़ती है, जिससे कोयले की खपत बढ़ती है और इससे उत्सर्जन बढ़कर गर्मी और तेज होती है। एक्सपर्ट्स इसे 'कूलिंग ट्रैप' कह रहे हैं।