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भारत के क्लाउड मैप पर अचानक बढ़ी सफेदी, आखिर किस बड़े बदलाव का मिल रहा है संकेत?

भारत के क्लाउड मैप पर अचानक बढ़ी सफेदी ने मौसम का पूरा मूड बदल दिया है। जून में कमजोर पड़ा मॉनसून अब नए एक्टिव फेज में पहुंचता दिख रहा है। आखिर इन सफेद बादलों का क्या मतलब है और किन इलाकों में बदलने वाला है मौसम, जानिए पूरी खबर में।

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AI Geberated Image

In Short

  • भारत के क्लाउड मैप पर दिख रही सफेदी घने और नमी से भरे ऊंचे बादलों का संकेत है, जिससे मॉनसून के एक्टिव होने की जानकारी मिलती है।
  • IMD ने अगले 4-5 दिनों में नॉर्थ और नॉर्थईस्ट इंडिया के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
  • ज्यादा बारिश से किसानों और फसलों को राहत मिलेगी, लेकिन पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड, नदियों में बाढ़ और शहरों में पानी भरने का खतरा भी बढ़ सकता है।

India Cloud: भारत के मौसम में जुलाई के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जून में जहां कई हिस्सों में मॉनसून कमजोर था और बारिश कम हो रही थी, वहीं अब बादलों की हलचल तेज हो गई है। क्लाउड मैप की तस्वीर देखकर लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह सामान्य बदलाव है या तेज बारिश का इशारा। तो सबसे पहले जानते हैं कि क्लाउड मैप पर दिखने वाला सफेद रंग आखिर क्या बताता है?

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क्लाउड मैप पर सफेद रंग का क्या मतलब?

ISRO के INSAT-3DR सैटेलाइट और IMD की इमेज में सफेद या ज्यादा चमकीला हिस्सा मोटे और घने बादलों को दिखाता है। ये बादल सूरज की रोशनी को नीचे आने से रोकते हैं।

इन बादलों का ऊपरी हिस्सा काफी ठंडा होता है, जिससे पता चलता है कि वे बहुत ऊंचे हैं और उनमें काफी नमी मौजूद है। लेकिन जून में यही बादल कम क्यों हो गए थे और जुलाई आते-आते मॉनसून कैसे बदल गया?

जून के बाद जुलाई में कैसे बदला मॉनसून?

जून में मॉनसून कमजोर था और कई जगह देर से पहुंचा। कई राज्यों में बादल कम थे, इसलिए बारिश भी घट गई थी। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई और कुछ इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे थे।

अब जुलाई के बीच में मॉनसून ट्रफ यानी बारिश वाला सिस्टम फिर से एक्टिव हो गया है, जिससे मौसम तेजी से बदला है। अब सवाल है कि बादलों को इतनी ज्यादा नमी आखिर मिल कहां से रही है?

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बढ़ी नमी

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी तेजी से आने लगी है। इसी वजह से देश के बड़े हिस्से में बादल बढ़ गए हैं। मौसम एक्सपर्ट इसे मॉनसून का नया एक्टिव फेज मान रहे हैं, जिसमें तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं।

अब जानते हैं कि इस बदले मौसम का असर किन राज्यों में सबसे ज्यादा दिखेगा?

इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

IMD के मुताबिक अगले 4-5 दिनों तक नॉर्थवेस्ट और नॉर्थईस्ट इंडिया में मॉनसून एक्टिव रहेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मेघालय में 21 जुलाई को हैवी से वेरी हैवी बारिश हो सकती है। कुछ जगह एक्सट्रीमली हैवी बारिश का भी अलर्ट है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 24 जुलाई तक अच्छी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 26 जुलाई तक बारिश जारी रहने की उम्मीद है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में 23 जुलाई तक बारिश हो सकती है।

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वहीं, पूर्वी राजस्थान में 23 से 26 जुलाई के बीच बारिश बढ़ सकती है। लेकिन क्या बारिश के साथ तेज हवा और लाइटनिंग का भी खतरा रहेगा?

तेज हवा और लाइटनिंग की भी आशंका

कई इलाकों में थंडरस्टॉर्म और लाइटनिंग के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 26 जुलाई तक बारिश होने की उम्मीद है। बिहार, झारखंड, वेस्ट बंगाल और सब-हिमालयन वेस्ट बंगाल में भी भारी बारिश का अलर्ट दिया गया है।

नॉर्थईस्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय समेत कई राज्यों में लगातार बारिश हो सकती है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात रीजन में भी बारिश बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश अभी कम रह सकती है।

लेकिन मॉनसून अचानक इतना एक्टिव कैसे हो गया और इसके पीछे साइंटिफिक वजह क्या है?

मॉनसून के एक्टिव होने की साइंटिफिक वजह

जून में वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम के साउथ की ओर खिसकने से मॉनसून का सिस्टम कमजोर पड़ गया था। ईस्टर्ली जेट भी दब गया था, जिससे बादल बनने की प्रोसेस धीमी हो गई थी। अब मॉनसून ट्रफ नॉर्थ इंडिया के ऊपर मजबूत हो गई है।

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इसके साथ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की दोनों ब्रांच एक्टिव हैं, जिससे नमी और बादल बढ़ गए हैं। अब सवाल है कि ज्यादा बारिश से किसानों को कितनी राहत मिलेगी और किन जगहों पर परेशानी बढ़ सकती है?

किसानों को राहत लेकिन नुकसान का भी डर

ज्यादा बारिश से फसलों को पानी मिलेगा, तालाब और जलाशय भरेंगे और खेती के काम में तेजी आएगी। हालांकि पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड, नदियों में बाढ़ और शहरों में पानी भरने की परेशानी भी बढ़ सकती है।

22 से 24 जुलाई के बीच कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 25 और 26 जुलाई को कुछ जगह बारिश थोड़ी कम पड़ सकती है। मौसम एक्सपर्ट के मुताबिक जब क्लाउड कवर 60% से ऊपर चला जाता है और ऊंचे-घने बादल बढ़ते हैं, तो मॉनसून को मजबूत माना जाता है। इसलिए क्लाउड मैप पर दिख रही सफेदी डर की बात नहीं, बल्कि अच्छी बारिश का संकेत है। हालांकि हर इलाके में एक जैसी बारिश नहीं होगी।