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Su-57 की खरीद पर उठे बड़े सवाल, जानें पूर्व वायुसेना प्रमुख ने क्यों दी चेतावनी?

रूस के Su-57 फाइटर जेट खरीदने की चर्चा के बीच पूर्व वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा है कि इससे भारत के स्वदेशी AMCA प्रोग्राम पर असर पड़ सकता है। उन्होंने लंबे समय के लिए स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन फाइटर विकसित करने पर जोर दिया।

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In Short

  • Su-57 की दो स्क्वाड्रन खरीदने की चर्चा के बीच AMCA प्रोग्राम को लेकर उठे सवाल
  • आरकेएस भदौरिया ने कहा विदेशी फाइटर खरीदने से AMCA के लिए जरूरी संसाधन और ध्यान बंट सकता है
  • AMCA का प्रोटोटाइप 2028 में आने की उम्मीद LCA Mk2 की देरी पर भी जताई चिंता

Su 57 Fighter Jet India: रूस के Su-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट की दो स्क्वाड्रन खरीदने की चर्चा के बीच पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा है कि इससे भारत के स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोग्राम पर असर पड़ सकता है।

भदौरिया ने कहा कि अगर भारत Su-57 खरीदता है तो यह AMCA के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने यह बात इंडिया टुडे के पॉडकास्ट ‘चक्रव्यूह’ में कही।

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Su-57 खरीद को लेकर क्या बोले भदौरिया?

Su-57 खरीदने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भदौरिया ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि भारतीय वायुसेना ने इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव शुरू किया है या नहीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्होंने सुना है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर Su-57 को शामिल किया जाता है तो यह AMCA को आगे बढ़ाने के प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।

AMCA पर क्यों पड़ सकता है असर?

भदौरिया के मुताबिक, भारत अगर विदेशी फिफ्थ जनरेशन फाइटर खरीदता है तो इससे AMCA के लिए जरूरी पैसा, लोगों की मेहनत और संस्थागत ध्यान बंट सकता है।

उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्ट को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए जरूरी ऊर्जा और संसाधन उपलब्ध कराना चुनौती बन सकता है। उनके अनुसार, भारत को लंबे समय के लिए अपना खुद का फिफ्थ जनरेशन फाइटर विकसित करना जरूरी है।

AMCA प्रोग्राम अभी विकास के दौर में

AMCA भारत का स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम है। यह अभी विकास के चरण में है और इसका प्रोटोटाइप 2028 में सामने आने की उम्मीद है।

AMCA के भारतीय वायुसेना में शामिल होने में अभी समय लग सकता है। इसके 2035 से पहले सेवा में आने की संभावना कम बताई जा रही है। इसी वजह से सरकार Su-57 की कम से कम दो स्क्वाड्रन यानी करीब 36 विमानों की खरीद पर विचार कर रही है।

AMCA के लिए दिखानी होगी प्रगति

भदौरिया ने कहा कि सिर्फ वायुसेना और रक्षा मंत्रालय को विदेशी विकल्प छोड़ने की बात नहीं करनी चाहिए। AMCA पर काम कर रही टीमों को भी अपनी प्रगति दिखानी होगी।

उन्होंने कहा कि अगर भारत को AMCA को सफल बनाना है तो इसके विकास में शामिल संस्थानों जैसे एडीए और एचएएल की ओर से भी लगातार परिणाम और तेजी दिखाई देनी चाहिए।

LCA Mk2 की देरी पर भी उठाए सवाल

पूर्व वायुसेना प्रमुख ने AMCA से पहले आने वाले LCA Mk2 प्रोग्राम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि AMCA के लिए तैयार किए जा रहे कुछ सिस्टम की जांच LCA Mk1 और Mk2 पर की जा रही है।

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उन्होंने कहा कि LCA Mk2 को पिछले साल उड़ान भरनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। भदौरिया ने कहा कि ऐसी देरी वायुसेना के लिए चिंता का कारण बनती है।

उन्होंने कहा कि AMCA को प्राथमिकता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए एचएएल और एडीए की ओर से काम की रफ्तार और नतीजे भी साफ दिखाई देने चाहिए।