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अब दुश्मन की खैर नहीं! DRDO ने टेस्ट की नई क्रूज मिसाइल, जानिए कितनी बढ़ जाएगी भारत की ताकत

भारत ने पहली बार ऐसी स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है जो दुश्मन के रडार को चकमा देकर हजारों किलोमीटर दूर तक सटीक हमला कर सकती है। इसकी क्षमता अमेरिकी टोमाहॉक मिसाइल से तुलना की जा रही है। जानिए यह मिसाइल भारत की सैन्य ताकत को कैसे बदल सकती है।

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भारत की टोमाहॉक मिसाइल
भारत की टोमाहॉक मिसाइल

In Short

  • रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण में सभी परिचालन और तकनीकी उद्देश्यों को हासिल कर लिया गया।
  • औपचारिक दीक्षा समारोह में अभी लगभग दो साल बाकी हैं, और आगे और भी परीक्षणों की योजना बनाई जा रही है।
  • डीआरडीओ और उद्योग जगत के सहयोग से विकसित यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी है।

अमेरिका की सबसे खतरनाक मिसाइलों में गिनी जाने वाली टोमाहॉक जैसी ताकत अब भारत के पास भी आ गई है। DRDO ने ओडिशा तट से देश की पहली लंबी दूरी की स्वदेशी क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। हाल ही में ईरान पर हमलों में टोमाहॉक मिसाइल की ताकत दुनिया ने देखी थी और अब भारत ने भी वैसी ही क्षमता वाली मिसाइल बनाकर अपनी सैन्य ताकत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

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पूरी तरह से स्वदेशी है यह नई मिसाइल

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि मिसाइल का यह टेस्ट पूरी तरह सफल रहा और जो भी लक्ष्य तय किए गए थे, वे सभी हासिल कर लिए गए। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह भारत में ही बनाया गया है। बेंगलुरु की ADE लैब ने DRDO की दूसरी टीमों और देश की कई कंपनियों के साथ मिलकर इसे तैयार किया है। हालांकि, यह मिसाइल अभी सेना में शामिल नहीं होगी। आने वाले करीब दो साल में इसके और टेस्ट किए जाएंगे, उसके बाद ही इसे सेना को सौंपा जाएगा।

दुश्मन के रडार को चकमा देने में माहिर

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एलआरएलएसीएम (LRLACM) की मारक क्षमता 1,000 से 1,500 किलोमीटर के बीच मानी जा रही है। बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, यह क्रूज मिसाइल बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है। कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण दुश्मन के रडार और वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसे जमीन, युद्धपोत या पनडुब्बी कहीं से भी दागा जा सकता है और यह पारंपरिक या परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है।

चीन और पाकिस्तान के ये शहर आए निशाने पर

इस मिसाइल की तैनाती से भारत को एक बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा मिलने वाला है। अगर इसे पाकिस्तान सीमा के पास तैनात किया जाता है, तो यह पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय रावलपिंडी, राजधानी इस्लामाबाद, लाहौर, फैसलाबाद और उसके सबसे बड़े आर्थिक व नौसैनिक केंद्र कराची को आसानी से निशाना बना सकती है। वहीं, अगर इसे चीन से सटी LAC के पास उत्तरी या पूर्वी इलाकों में तैनात किया जाए, तो यह चीन के सैन्य बुनियादी ढांचे वाले शहर ल्हासा, चेंगदू, उरुमकी और कुनमिंग जैसे रणनीतिक केंद्रों को पूरी तरह अपनी जद में ले लेगी।

क्यों गेम-चेंजर है यह तकनीक?

असल में यह मिसाइल DRDO के पुराने निर्भय प्रोजेक्ट का और ज्यादा एडवांस्ड व मजबूत वर्जन है। निर्भय मिसाइल को शुरुआती दौर में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब भारत ने उसी अनुभव के दम पर कहीं ज्यादा बेहतर और भरोसेमंद मिसाइल तैयार कर ली है।

पिछले कुछ सालों में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखा दिया है कि दूर से सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें कितनी अहम हो गई हैं। ऐसे हथियार दुश्मन के बड़े ठिकानों पर बिना सैनिकों को खतरे में डाले हमला कर सकते हैं। यही वजह है कि DRDO की यह नई मिसाइल भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इसके सेना में शामिल होने के बाद भारत की दुश्मन पर दूर से सटीक वार करने की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

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