दिल्ली में H1N1 का बढ़ता खतरा! एक साल में छह गुना बढ़े मामले, डॉक्टर भी आए चपेट में
दिल्ली में H1N1 फ्लू के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। 12 अगस्त तक राजधानी में 1,449 केस दर्ज हुए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले छह गुना ज्यादा हैं। संक्रमण की चपेट में हेल्थ वर्कर्स भी आए हैं। डॉक्टरों ने बढ़ते मामलों के बीच सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

In Short
- दिल्ली में H1N1 के मामले एक साल में 229 से बढ़कर 1,449 पहुंचे
- सरकारी अस्पतालों के कुछ डॉक्टर भी हुए संक्रमित बढ़ी चिंता
- विशेषज्ञों ने कहा हल्के मामलों की रिपोर्टिंग कम होने से असली आंकड़े ज्यादा हो सकते हैं
दिल्ली में H1N1 फ्लू के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस साल 12 अगस्त तक राजधानी में 1,449 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल इसी अवधि के 229 मामलों से छह गुना ज्यादा हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले कुछ डॉक्टर भी इसकी चपेट में आए हैं और कुछ को इलाज के लिए भर्ती तक करना पड़ा है। इस बढ़ते खतरे के पीछे क्या वजहें हैं और अस्पतालों में क्या स्थिति है, इसे समझना जरूरी है।
संक्रमण का असर हेल्थ सिस्टम तक पहुंचा
दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों का असर अब हेल्थ सिस्टम पर भी दिख रहा है। डॉक्टरों के संक्रमित होने से चिंता बढ़ी है क्योंकि वे लगातार सांस से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों के संपर्क में रहते हैं। इससे संक्रमण के फैलाव को लेकर सतर्कता और बढ़ गई है।
दिल्ली में H1N1 का असर पहले भी देखने को मिला है। साल 2024 में राजधानी में 3,151 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2021 में 92, 2022 में 442 और 2023 में 209 मामले सामने आए थे। देशभर में भी H1N1 के मामलों में उतार चढ़ाव रहा है। भारत में 2024 में 20,414 मामले दर्ज किए गए थे और 347 लोगों की मौत हुई थी।
हल्के मामलों की रिपोर्टिंग कम होने की आशंका
डॉक्टरों का कहना है कि सामने आ रहे आंकड़े संक्रमण की असली तस्वीर से कम हो सकते हैं। कई लोगों में लक्षण हल्के होते हैं और वे टेस्ट नहीं कराते या घर पर ही ठीक हो जाते हैं। ऐसे मामले सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाते।
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून के दौरान घरों में ज्यादा समय बिताना लोगों के बीच संक्रमण बढ़ा सकता है। इसके अलावा इम्युनिटी में कमी, टेस्टिंग बढ़ना और वायरस में छोटे बदलाव भी मामलों में बढ़ोतरी की वजह हो सकते हैं।
नया महामारी वाला स्ट्रेन मिलने का कोई सबूत नहीं
डॉक्टरों के अनुसार अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि दिल्ली में H1N1 का कोई नया खतरनाक स्ट्रेन फैला है। वायरस में छोटे बदलाव को एंटीजनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है, जिससे वायरस कुछ हद तक पुरानी इम्युनिटी से बच सकता है।
हालांकि अभी इसे एंटीजनिक शिफ्ट नहीं माना जा रहा है। एंटीजनिक शिफ्ट में वायरस में बड़ा बदलाव होता है, जिससे महामारी का खतरा पैदा हो सकता है।
बुखार खांसी और गले में दर्द जैसे लक्षण दिख रहे
अस्पतालों में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें तेज बुखार, ठंड लगना, नाक बहना, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं शामिल हैं। कुछ मरीजों में उल्टी और कमजोरी भी देखी जा रही है।
ज्यादातर स्वस्थ लोगों में यह बीमारी आराम, पानी पीने और सामान्य इलाज से ठीक हो जाती है। लेकिन बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और पहले से बीमारी से जूझ रहे लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।
वैक्सीन लेने के बाद भी क्यों हो रहा संक्रमण
विशेषज्ञों का कहना है कि H1N1 वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन वैक्सीन गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करती है।
डॉक्टरों ने बुजुर्गों, हेल्थ वर्कर्स, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज, अस्थमा, हार्ट या किडनी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को वैक्सीन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा लेने से बचने को कहा गया है।
अब अस्पताल में भर्ती और गंभीर मामलों पर नजर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ संक्रमित मरीजों की संख्या पर ध्यान देना काफी नहीं है। अब यह देखना जरूरी है कि कितने मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, कितनों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है और कितने मामले गंभीर हो रहे हैं।
फिलहाल डॉक्टरों ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने, लक्षण होने पर मास्क पहनने, हाथों की सफाई रखने और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में राज्यों से मिलने वाले नए आंकड़े बताएंगे कि H1N1 का यह बढ़ना सिर्फ मौसमी बढ़ोतरी है या कोई बड़ा स्वास्थ्य संकट बन रहा है।

