scorecardresearch

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भारत का बड़ा लक्ष्य! घरेलू वैल्यू एडिशन को 40% तक ले जाने की तैयारी

भारत मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। सरकार का फोकस अब सिर्फ फोन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे बदलाव पर है जो आने वाले समय में भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने में मदद कर सकता है। पूरी कहानी में जानिए कैसे।

Advertisement

भारत अब मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता है। सरकार का लक्ष्य है कि देश में बनने वाले मोबाइल फोन में घरेलू वैल्यू एडिशन को मौजूदा 22 से 23% से बढ़ाकर 35 से 40% तक किया जाए। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए अब कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इसी दिशा में सरकार घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

advertisement

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY के सचिव एस कृष्णन ने  Business Today India@100 Summit, समिट में कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब हर चीज देश में बनाना नहीं है बल्कि भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी सप्लाई चेन तैयार करनी होगी जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हो और भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी भूमिका निभा सके।

मोबाइल फोन सेक्टर ने दिखाई तेज ग्रोथ

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन साल 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस पूरे सेक्टर से करीब 25 लाख नौकरियां जुड़ी हुई हैं।

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग इस ग्रोथ का सबसे बड़ा हिस्सा रहा है। देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 में 18,900 करोड़ रुपये था जो 2025-26 में बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं मोबाइल फोन एक्सपोर्ट 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

अब फोकस कंपोनेंट बनाने पर

एस कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन असेंबली ने भारत को बड़े स्तर पर उत्पादन और रोजगार देने में मदद की है। देश की कई बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्रियों में 50 हजार से 70 हजार तक लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि असेंबली को छोटा नहीं समझना चाहिए क्योंकि इसी से बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होता है और धीरे-धीरे वैल्यू एडिशन बढ़ता है।

अब सरकार कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम यानी ECMS पर काम कर रही है। मार्च 2025 में शुरू हुई इस योजना का शुरुआती बजट 22,919 करोड़ रुपये था जिसे 2026 के बजट में बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया।

इस योजना के तहत अब तक 75 एप्लीकेशन को मंजूरी मिल चुकी है जो 23 अलग-अलग प्रोडक्ट से जुड़े हैं। इन प्रोजेक्ट्स से 61,671 करोड़ रुपये के निवेश, 4.51 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन और 65,040 डायरेक्ट नौकरियों की उम्मीद है। इनमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कैमरा मॉड्यूल, इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंपोनेंट और दूसरे जरूरी हिस्से शामिल हैं।

सेमीकंडक्टर और नई टेक्नोलॉजी पर नजर

सरकार मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाकर एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में इस्तेमाल करना चाहती है। कृष्णन के अनुसार मोबाइल फोन से विकसित हुई प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल AR और VR हेडसेट, स्मार्ट ग्लास जैसे प्रोडक्ट बनाने में किया जा सकता है।

advertisement

भारत सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए FY2026-27 से FY2030-31 तक पांच साल के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, सप्लाई चेन को मजबूत करना और भारत को ग्लोबल मार्केट में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है।

वहीं सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी तेजी से काम चल रहा है। भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं जबकि 2026 के अंत तक दो से तीन और प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद है। सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस पैकेजिंग और मटेरियल सेक्टर को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।

भारत का लक्ष्य आत्मनिर्भरता के साथ ग्लोबल ताकत बनना

एस कृष्णन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पूरी तरह ग्लोबल है और किसी भी प्रोडक्ट के अलग-अलग हिस्से कई देशों से होकर गुजरते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक मोबाइल फोन अंतिम ग्राहक तक पहुंचने से पहले करीब 70 बॉर्डर पार कर सकता है।

ऐसे में भारत का लक्ष्य खुद को दुनिया से अलग करना नहीं बल्कि अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाना है। घरेलू उत्पादन क्षमता, मजबूत सप्लाई चेन और बेहतर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।

advertisement