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साफ हवा की तलाश में कनाडाई शख्स ने बदले तीन शहर! भारत के प्रदूषण पर उठाए सवाल

भारत में बढ़ते एयर पॉल्यूशन को लेकर चिंता के बीच कनाडाई नागरिक Caleb Friesen ने अपनी कहानी साझा की है। दिल्ली से बेंगलुरु और फिर मिजोरम तक का सफर उन्होंने बच्चों की सेहत और साफ हवा की तलाश में तय किया। उनका सवाल है कि अच्छी हवा के लिए लोगों को शहर क्यों छोड़ना पड़े।

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In Short

  • दिल्ली से मिजोरम तक सफर: प्रदूषण की वजह से Caleb Friesen ने तीन शहर बदले और बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दी।
  • शहरों की हवा पर सवाल: उन्होंने पूछा कि साफ हवा के लिए लोगों को पहाड़ों की ओर जाने के लिए मजबूर क्यों होना चाहिए।
  • प्रदूषण समाधान की जरूरत: Friesen ने टेक्नोलॉजी के साथ-साथ हर नागरिक को बेहतर एयर क्वालिटी मिलने की जरूरत बताई।

कनाडा के रहने वाले Caleb Friesen ने भारत को अपना घर चुना लेकिन बढ़ते वायु प्रदूषण ने उन्हें अपने रहने की जगह बदलने के लिए मजबूर कर दिया। बच्चों की सेहत को लेकर चिंता के चलते उन्होंने दिल्ली से बेंगलुरु और फिर मिजोरम का रुख किया। उनका कहना है कि साफ हवा के लिए लोगों को शहर छोड़कर पहाड़ों की तरफ नहीं जाना चाहिए।

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दिल्ली के प्रदूषण से शुरू हुई साफ हवा की तलाश

Caleb Friesen ने बताया कि साल 2018 में दिल्ली छोड़ने की बड़ी वजह वहां का गंभीर एयर पॉल्यूशन था। सर्दियों के दौरान उन्होंने पीएम 2.5 का स्तर 999 या उससे ज्यादा देखा था। इसके बाद वह बेंगलुरु चले गए क्योंकि इसे भारत का गार्डन सिटी कहा जाता है और उन्हें उम्मीद थी कि यहां माहौल बेहतर होगा।

लेकिन समय के साथ उन्हें लगा कि बेंगलुरु की एयर क्वालिटी भी लगातार खराब हो रही है। इसके बाद उन्होंने फिर से जगह बदलने का फैसला किया।

बच्चों की सेहत के लिए चुना मिजोरम

साल 2026 की शुरुआत में Friesen अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मिजोरम के आइजोल चले गए। उनकी पत्नी का परिवार भी वहीं रहता है। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे।

Friesen ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह खुश हैं कि उन्होंने जगह बदली क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे अस्थमा से जूझें। हालांकि उनका कहना था कि भारत छोड़ना उनका मकसद नहीं था बल्कि वह देश में रहते हुए बेहतर माहौल चाहते थे।

शहर छोड़कर पहाड़ों पर जाने का सवाल

Friesen ने सवाल उठाया कि आखिर भारत के बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को सिर्फ साफ हवा के लिए पहाड़ों की तरफ क्यों जाना पड़े। उनका मानना है कि हर नागरिक को अच्छी एयर क्वालिटी मिलना एक सामान्य सुविधा होनी चाहिए।

उन्होंने एयर प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली मुंबई की कंपनी Praan का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक कंपनी की फिल्टरलेस एयर प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी हवा के कणों को पकड़ने में मदद करती है और इन्हें दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

भारत में प्रदूषण की बड़ी चुनौती

Friesen ने आईक्यू एयर के डेटा का हवाला देते हुए दावा किया कि दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में 29 भारत के हैं। उन्होंने इंडस्ट्री से होने वाले प्रदूषण की तरफ भी ध्यान दिलाया और कहा कि समस्या सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है।

हालांकि उनके बताए आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से जांचा नहीं गया है। पीएम 2.5 की रीडिंग जगह, मशीन और मापने के तरीके के आधार पर बदल सकती है। लेकिन उनका मुद्दा साफ है कि भारत में साफ हवा को लेकर बड़े स्तर पर समाधान की जरूरत है।

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