scorecardresearch

BRICS Summit 2026: पीएम मोदी के डिनर टेबल पर परोसी गई दुर्लभ गुच्छी, 40 हजार रुपये किलो तक है कीमत

BRICS Summit 2026 के डिनर में हिमालय की दुर्लभ गुच्छी से बनी खास डिश Gucchi Marmik परोसी गई। गुच्छी अपने खास स्वाद और कम उपलब्धता के लिए जानी जाती है। इसे जंगलों से हाथ से इकट्ठा किया जाता है और सुखाने के बाद इसकी कीमत हजारों रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

Advertisement

In Short

  • BRICS Summit 2026 के डिनर में दुर्लभ हिमालयी गुच्छी से बनी Gucchi Marmik डिश परोसी गई।
  • गुच्छी की कीमत इसकी कम उपलब्धता और मुश्किल तरीके से होने वाली हार्वेस्टिंग की वजह से काफी ज्यादा है।
  • गुच्छी का खास स्वाद इसे महंगे और पसंद किए जाने वाले मशरूम में शामिल करता है।

BRICS Summit 2026 के डिनर में भारत के हिमालयी क्षेत्र की एक बेहद खास चीज ने लोगों का ध्यान खींचा। Gucchi Marmik नाम की पारंपरिक डिश में गुच्छी मशरूम का इस्तेमाल किया गया। गुच्छी भारत के सबसे महंगे और दुर्लभ जंगली खाद्य पदार्थों में गिनी जाती है। इसकी कीमत अच्छी क्वालिटी और उपलब्धता के हिसाब से हजारों रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

advertisement

क्या है गुच्छी मशरूम?

दुनियाभर में Morel Mushroom के नाम से पहचानी जाने वाली गुच्छी को वैज्ञानिक रूप से Morchella esculenta कहा जाता है। यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में पाई जाती है। आम बटन और ऑयस्टर मशरूम की तरह इसकी बड़े पैमाने पर खेती नहीं होती। यह मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचाई वाले जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है।

गुच्छी के लिए मिट्टी, नमी, तापमान में बदलाव और मौसम के साथ होने वाली बर्फ पिघलने जैसी कई प्राकृतिक परिस्थितियां जरूरी होती हैं। यही वजह है कि इसका उगना काफी अनिश्चित माना जाता है।

कुछ ही हफ्तों का होता है सीजन

गुच्छी को जंगलों से इकट्ठा करना भी आसान काम नहीं है। पहाड़ी इलाकों में स्थानीय लोग इसे हाथ से चुनते हैं और इसके लिए कई बार खड़ी और मुश्किल जमीन पर चलना पड़ता है। वसंत के मौसम में इसे खोजने और इकट्ठा करने के लिए आमतौर पर कुछ ही हफ्तों का समय मिलता है।

(Photo: Aaj Tak)

इसकी सीमित उपलब्धता और मुश्किल हार्वेस्टिंग ने इसे दुनिया के महंगे culinary fungi में शामिल किया है। अच्छी क्वालिटी की सूखी गुच्छी की कीमत करीब 15,000 से 40,000 रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है। हालांकि कीमत क्वालिटी, उपलब्धता और बाजार की स्थिति के हिसाब से बदल सकती है।

महंगी होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

गुच्छी की कीमत सिर्फ इसके स्वाद की वजह से नहीं है। इसे बड़े पैमाने पर आसानी से उगाया नहीं जा सकता। इसके अलावा इसे पहाड़ी जंगलों से हाथ से इकट्ठा करना पड़ता है। ताजा गुच्छी में काफी नमी होती है और इसे सुरक्षित रखने के लिए आमतौर पर सुखाया जाता है। इससे इसका वजन काफी कम हो जाता है और सूखी गुच्छी की कीमत बढ़ जाती है।

खास स्वाद और बनावट

गुच्छी की पहचान इसकी honeycomb जैसी टोपी से होती है, जिसका रंग हल्के पीले से गहरे भूरे तक हो सकता है। इसका तना आमतौर पर हल्के रंग का और खोखला होता है। इसका स्वाद earthy, musky और umami-rich माना जाता है। सुखाने के बाद इसकी खुशबू और स्वाद और ज्यादा गहरा हो सकता है। इसका इस्तेमाल ग्रेवी, चावल, सॉस और कई दूसरी डिश में किया जाता है।

advertisement

क्या गुच्छी को बिजली गिरने के बाद उगने की बात सच है?

गुच्छी से जुड़ी एक दिलचस्प मान्यता यह भी है कि बिजली गिरने के बाद यह मशरूम उगता है। हिमालयी समुदायों में यह धारणा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, ऐसा कोई स्थापित वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि बिजली सीधे गुच्छी के उगने की वजह बनती है। इसके उगने के पीछे कई जटिल प्राकृतिक परिस्थितियां काम करती हैं।

पोषण से ज्यादा इसकी कीमत दुर्लभता की वजह से

गुच्छी में प्रोटीन, डाइटरी फाइबर और कुछ antioxidant compounds पाए जाते हैं। इसमें vitamin D भी होने की बात कही जाती है, हालांकि इसकी मात्रा कई चीजों पर निर्भर कर सकती है। इसकी ऊंची कीमत की मुख्य वजह इसका पोषण नहीं, बल्कि जंगली स्रोत, कम उपलब्धता, मेहनत से संग्रह और सुखाने की प्रक्रिया है।

BRICS Summit के डिनर में Gucchi Marmik का शामिल होना हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक खाद्य विरासत और इसकी खास culinary पहचान को सामने लाता है।