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Trump की रणनीति को झटका, भारत के लिए अच्छी खबर? ब्राजील में Lula की जीत पर कंवल सिब्बल ने बताई बड़ी वजह

Brazil Election 2026: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में Lula da Silva की जीत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस नतीजे को भारत और BRICS के लिए सकारात्मक बताया है। वहीं, उन्होंने इसे Donald Trump की लैटिन अमेरिका से जुड़ी रणनीति के लिए झटका माना है। जानिए इसके पीछे क्या वजह है।

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'BRICS कमजोर पड़ जाता'... कंवल सिब्बल ने बताया Lula की दोबारा जीत से भारत की स्थिति कैसे होगी मजबूत
'BRICS कमजोर पड़ जाता'... कंवल सिब्बल ने बताया Lula की दोबारा जीत से भारत की स्थिति कैसे होगी मजबूत

In Short

  • ब्राजील चुनाव में Lula को 51.79% और Flávio Bolsonaro को 48.21% वोट मिले।
  • कंवल सिब्बल ने Lula की जीत को भारत और BRICS के लिए सकारात्मक बताया।
  • पूर्व विदेश सचिव के मुताबिक, चुनाव नतीजे से Trump की क्षेत्रीय रणनीति को झटका लगा।

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा (Lula da Silva) ने एक बार फिर जीत हासिल की है। इस नतीजे को सिर्फ ब्राजील ही नहीं, बल्कि भारत, अमेरिका और BRICS के लिए भी अहम माना जा रहा है। भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल का कहना है कि लूला की जीत से भारत के साथ रिश्तों को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लैटिन अमेरिका से जुड़ी रणनीति के लिए झटका भी बताया है।

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Lula को मिले कितने वोट?

ब्राजील के चुनाव आयोग के मुताबिक, लूला को 51.79 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट हासिल हुए। इस जीत के साथ लूला चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति चुने गए हैं। 

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि लूला की जीत का बड़ा भू-राजनीतिक महत्व है। उनके मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ब्राजील में अमेरिका के करीब मानी जाने वाली सरकार चाहता था। सिब्बल ने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन ने बोल्सोनारो के पक्ष में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।

Trump और Lula के बीच क्यों बढ़ा था तनाव?

साल 2025 में अमेरिका ने ब्राजील के कुछ सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था। इसके पीछे एक वजह पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के खिलाफ ब्राजील में चल रही कानूनी कार्रवाई भी थी।

लूला ने अमेरिकी दबाव का विरोध करते हुए कहा था कि ब्राजील की न्यायपालिका और घरेलू मामलों में बाहरी दखल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, ट्रंप ने 2026 के चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो का औपचारिक समर्थन नहीं किया था। ऐसे में चुनाव नतीजे को ट्रंप की सीधी चुनावी हार कहना सही नहीं होगा।

भारत और BRICS के लिए क्यों अहम है जीत?

कंवल सिब्बल के मुताबिक, अगर लूला चुनाव हार जाते, तो विकासशील देशों के समूह Global South और BRICS की स्थिति कमजोर हो सकती थी। उनका कहना है कि लैटिन अमेरिका में ब्राजील Global South की एक महत्वपूर्ण आवाज है।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि बोल्सोनारो की जीत से BRICS में ब्राजील की भूमिका को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती थी। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है।

भारत-ब्राजील के रिश्तों पर क्या होगा असर?

सिब्बल का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लूला के बीच बढ़ते संपर्क से दोनों देशों के रिश्तों को फायदा मिल सकता है।

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फरवरी 2026 में लूला की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल टेक्नोलॉजी, माइनिंग, दवाओं और छोटे कारोबारों से जुड़े सहयोग पर चर्चा और समझौते किए थे।

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 15.21 अरब डॉलर रहा।

ऐसे में लूला की वापसी से दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, BRICS और भारत-अमेरिका-ब्राजील संबंधों पर इसका वास्तविक असर आने वाले नीतिगत फैसलों से स्पष्ट होगा।