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बारिश की कमी होगी पूरी? अगले सात से दस दिन मानसून के लिए अहम

बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसम सिस्टम के चलते आने वाले सात से दस दिन दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अहम हो सकते हैं। कई लो-प्रेशर सिस्टम पूर्वी और मध्य भारत में बारिश बढ़ा सकते हैं। सितंबर की शुरुआत अब पूरे मानसून सीजन के अंतिम आंकड़ों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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In Short

  • बंगाल की खाड़ी में अगले पांच से सात दिनों में कई लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है।
  • पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है।
  • देश में अब तक सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौसम से जुड़े कई सिस्टम बनने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले सात से दस दिन दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए काफी अहम रह सकते हैं। इस दौरान कई लो-प्रेशर सिस्टम बनकर जमीन की ओर बढ़ सकते हैं और बारिश बढ़ा सकते हैं।

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बंगाल की खाड़ी से बन रही नई स्थिति

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से पश्चिमी प्रशांत तक एक लंबा कन्वर्जेंस जोन बन रहा है। ऐसे क्षेत्र में नमी से भरी हवाएं एक जगह इकट्ठा होती हैं और लो-प्रेशर सिस्टम बनने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती हैं।

इसी वजह से अगले पांच से सात दिनों में कई लो-प्रेशर सिस्टम विकसित होने की संभावना जताई गई है।

पूर्वी और मध्य भारत में बढ़ सकती है बारिश

इन सिस्टम के पश्चिम की ओर बढ़ने के साथ पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश हो सकती है।

अगर ये सिस्टम मजबूत रहते हैं तो उन इलाकों को राहत मिल सकती है जहां इस मानसून सीजन में अब तक बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम की यह गतिविधि आने वाले दिनों में बारिश के कुल आंकड़ों पर भी असर डाल सकती है।

सितंबर की शुरुआत क्यों है अहम

सितंबर का पहला आधा हिस्सा इस बार मानसून के अंतिम प्रदर्शन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में होने वाली बारिश सीजन के अंतिम आंकड़ों को बदल सकती है। मानसून की सक्रियता के आधार पर मौजूदा स्तर से करीब पांच फीसदी ऊपर या नीचे का बदलाव संभव बताया गया है।

देशभर में बारिश का हाल असमान

2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में अब तक बारिश का वितरण काफी असमान रहा है।

लद्दाख में सामान्य से 204 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में 51 फीसदी, ओडिशा में 25 फीसदी और दिल्ली में 18 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

दूसरी ओर मेघालय में सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मणिपुर में 43 फीसदी, बिहार में 42 फीसदी और अरुणाचल प्रदेश व आंध्र प्रदेश में करीब 40 फीसदी की कमी बनी हुई है।

पूरे देश में अब भी 13 फीसदी की कमी

देशभर में अब तक 587.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 679.5 मिमी है। इस तरह पूरे भारत में मानसूनी बारिश फिलहाल 13 फीसदी कम है।

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इसके बावजूद मानसून अभी India Meteorological Department की सामान्य बारिश वाली कैटेगरी में बना हुआ है। अब बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम और सितंबर की शुरुआत की बारिश तय कर सकती है कि 2026 का मानसून आखिर कहां खत्म होता है।