1997-98 में $5.7 ट्रिलियन का नुकसान, क्या 2026 का अल नीनो तोड़ेगा ये रिकॉर्ड?
वैज्ञानिकों का कहना है कि 2026 में बनने वाला अल नीनो अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक हो सकता है. यह चेतावनी भारत के लिए अहम है क्योंकि कमजोर मॉनसून का असर फसलों, कीमतों और पानी की सप्लाई पर पड़ सकता है.

In Short
- $5.7 ट्रिलियन का नुकसान 1997-98 के अल नीनो से दुनिया की अर्थव्यवस्था को करीब $5.7 ट्रिलियन का नुकसान हुआ था
- 2026 में बड़ा खतरा इस बार अल नीनो बेहद मजबूत हो सकता है और दिसंबर तक चरम पर पहुंच सकता है
- भारत पर असर कमजोर मानसून से फसल, खाने की कीमतों, महंगाई और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है
2026 में आने वाला अल नीनो इस बार कितना बड़ा असर डाल सकता है, इसे लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अल नीनो पहले के बड़े रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है और इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
इस चेतावनी को ‘Science’ जर्नल में प्रकाशित एक अहम स्टडी का भी समर्थन मिला है। स्टडी के मुताबिक, El Nino सिर्फ कुछ समय के लिए मौसम को नहीं बदलता, बल्कि इसका असर आर्थिक ग्रोथ पर कई सालों तक रह सकता है। यानी El Nino खत्म होने के बाद भी कई देशों की अर्थव्यवस्था को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है।
रिसर्च के मुताबिक, अल नीनो की वजह से पहले भी दुनिया को खरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो चुका है। 1982-83 के अल नीनो से करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर और 1997-98 के अल नीनो से करीब 5.7 ट्रिलियन डॉलर की वैश्विक आय का नुकसान हुआ था।
2026 का अल नीनो क्यों है चिंता की बात?
मौसम पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र का तापमान काफी बढ़ चुका है। आने वाले महीनों में समुद्र के अंदर जमा गर्मी और बढ़ सकती है। अनुमान है कि अल नीनो दिसंबर 2026 के आसपास सबसे ज्यादा मजबूत हो सकता है और इसका असर 2027 तक मौसम पर देखने को मिल सकता है।
रिसर्च के मुताबिक, बढ़ता जलवायु बदलाव अल नीनो और ला नीना से जुड़े मौसम के बदलाव को और तेज कर सकता है। मौजूदा जलवायु लक्ष्यों के हिसाब से भी इस सदी में ऐसे मौसम के कारण दुनिया को करीब 84 ट्रिलियन डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
भारत के लिए खतरा क्यों बड़ा है?
भारत के लिए अल नीनो की चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि देश की खेती अभी भी मानसून पर काफी निर्भर है। अगर अल नीनो मजबूत होता है और मानसून कमजोर या असमान रहता है, तो किसानों पर सीधा असर पड़ सकता है।
कम बारिश से फसल की पैदावार घट सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
सिर्फ खेती ही नहीं, पानी की कमी का असर बिजली, कारखानों, सामान की ढुलाई और दूसरे कारोबार पर भी पड़ सकता है। अगर कहीं बहुत ज्यादा बारिश या बाढ़ आती है, तो सड़क, रेल और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंच सकता है।
यही वजह है कि इस बार वैज्ञानिक और अर्थशास्त्री अल नीनो को सिर्फ मौसम की समस्या नहीं मान रहे हैं। अगर 2026 का अल नीनो बहुत मजबूत होता है, तो इसका असर खेती से लेकर महंगाई और कारोबार तक कई जगह दिखाई दे सकता है।

