भारत में बढ़ रहा साइबर फ्रॉड का डर! हर 8 में से एक व्यक्ति ठगी का शिकार, 72% लोगों ने बदली ऑनलाइन आदतें
भारत तेजी से डिजिटल इंडिया और 6G की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन ऑनलाइन धोखाधड़ी का डर लोगों का भरोसा कमजोर कर रहा है। GSMA के सर्वे के मुताबिक, 72% भारतीय साइबर फ्रॉड की चिंता के कारण इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतें बदल रहे हैं। सर्वे में ठगी के शिकार लोगों को लेकर भी अहम आंकड़े सामने आए हैं। जानिए GSMA ने क्या चेतावनी दी है।

In Short
- ऑनलाइन फ्रॉड के डर से 70 से 72% भारतीय बदल रहे डिजिटल आदतें।
- पिछले 12 महीनों में करीब हर 8 में से एक भारतीय ठगी का शिकार।
- भारत में 2030 तक 5G अपनाने की दर 62% पहुंचने का अनुमान।
भारत में ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का असर अब लोगों की डिजिटल आदतों पर भी पड़ रहा है। टेलीकॉम इंडस्ट्री की वैश्विक संस्था GSMA के एक सर्वे के मुताबिक, करीब 70 से 72% भारतीय ऑनलाइन धोखाधड़ी के डर से इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके बदल रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब भारत डिजिटल इंडिया, 5G और भविष्य की 6G तकनीक में दुनिया का प्रमुख देश बनने की तैयारी कर रहा है।
हर 8 में से एक भारतीय ऑनलाइन ठगी का शिकार
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) के दौरान GSMA के एशिया पैसिफिक प्रमुख जूलियन गोरमन ने साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सर्वे के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में करीब हर आठ में से एक भारतीय ऑनलाइन ठगी का शिकार हुआ है। कई लोगों को शिकायत दर्ज कराने के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
गोरमन ने कहा कि भारत अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन दो-तिहाई से ज्यादा लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर चिंतित हैं। उनके मुताबिक, डिजिटल सेवाओं पर लोगों का भरोसा बनाए रखना टेलीकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
क्या Starlink जैसी सैटेलाइट सेवाएं मोबाइल नेटवर्क की जगह लेंगी?
सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर गोरमन ने कहा कि Starlink जैसी सेवाएं मौजूदा मोबाइल नेटवर्क की जगह नहीं लेंगी, बल्कि उनकी मदद करेंगी। भारत में मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहले ही 98% से ज्यादा आबादी तक पहुंच चुका है। सैटेलाइट इंटरनेट मुख्य रूप से दूरदराज के इलाकों और समुद्र जैसे स्थानों पर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में उपयोगी होगा।
उन्होंने कहा कि किसी तकनीक को सबसे पहले लॉन्च करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। भारत ने सबसे पहले 5G लॉन्च नहीं किया था, लेकिन आज यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G बाजार है।
सैटेलाइट इंटरनेट की कीमत भी बड़ी चुनौती
गोरमन के मुताबिक, भारत में मोबाइल इंटरनेट की दरें दुनिया में सबसे कम दरों में शामिल हैं। ऐसे में महंगा सैटेलाइट इंटरनेट आम लोगों तक पहुंचाना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार और कंपनियों को उन करोड़ों लोगों को मोबाइल ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जो अभी इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों को निवेश के लिए बेहतर माहौल देना भी जरूरी है, ताकि वे 5G नेटवर्क का विस्तार कर सकें और भविष्य में 6G की तैयारी कर सकें।
2030 तक कितना बड़ा होगा मोबाइल बाजार?
GSMA के अनुमान के मुताबिक, एशिया-पैसिफिक का मोबाइल बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, भारत में 5G अपनाने की दर 62% तक पहुंचने का अनुमान है, जो क्षेत्रीय औसत से ज्यादा होगी।
गोरमन ने बताया कि वैश्विक 6G मानक 2028 के आसपास तय हो सकते हैं और 2030 के शुरुआती वर्षों में इसका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि नई तकनीक के साथ लोगों का डिजिटल सेवाओं पर भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

