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Microsoft ने 60,000 कर्मचारियों को दिया बायआउट ऑफर, फिर क्यों जुटाए 25 अरब डॉलर?

माइक्रोसॉफ्ट ने AI पर बढ़ते खर्च के बीच अमेरिकी बॉन्ड मार्केट से 25 अरब डॉलर जुटाए हैं। हैरानी की बात यह है कि कंपनी के पास पहले से अरबों डॉलर की नकदी मौजूद है। वहीं, हजारों कर्मचारियों को बायआउट ऑफर भी दिया गया है। आखिर कंपनी की रणनीति क्या है?

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In Short

  • माइक्रोसॉफ्ट ने 2017 के बाद पहली बार अमेरिकी बॉन्ड मार्केट से 25 अरब डॉलर जुटाए हैं।
  • कंपनी ने भारत समेत चार देशों में करीब 60,000 योग्य कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट ऑफर दिया है।
  • AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च के बीच माइक्रोसॉफ्ट को दिसंबर तिमाही में 50 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की उम्मीद है।

टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI में बढ़ते निवेश के बीच अमेरिकी बॉन्ड मार्केट से 25 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी ने 2017 के बाद पहली बार अमेरिका में बॉन्ड जारी किए हैं। खास बात यह है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब माइक्रोसॉफ्ट ने भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में करीब 60,000 योग्य कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट ऑफर दिया है। हालांकि, कंपनी ने दोनों फैसलों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं बताया है।

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अरबों डॉलर की कमाई, फिर कर्ज क्यों ले रही Microsoft?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट के 25 अरब डॉलर के बॉन्ड इश्यू को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। कंपनी को एक समय 115 अरब डॉलर तक के ऑर्डर मिले, जो बॉन्ड इश्यू के मुकाबले करीब 4.6 गुना ज्यादा थे।

कंपनी ने 2 साल से लेकर 40 साल तक की अवधि वाले 10 तरह के बॉन्ड जारी किए हैं। इससे पहले 2017 में माइक्रोसॉफ्ट ने 17 अरब डॉलर जुटाए थे।

दिलचस्प बात यह है कि माइक्रोसॉफ्ट के पास नकदी की कमी नहीं है। सितंबर तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 58 अरब डॉलर और फ्री कैश फ्लो 18.6 अरब डॉलर रहा। कंपनी का रेवेन्यू 19 फीसदी बढ़कर 92.3 अरब डॉलर पहुंच गया। सितंबर के आखिर तक उसके पास 64.5 अरब डॉलर की नकदी और शॉर्ट टर्म निवेश मौजूद थे।

AI पर पानी की तरह पैसा खर्च कर रही कंपनी

माइक्रोसॉफ्ट का सबसे बड़ा फोकस AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर है। सितंबर तिमाही में कंपनी ने 45.2 अरब डॉलर का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया। इसमें करीब तीन-चौथाई रकम मुख्य रूप से CPU, GPU, मेमोरी और स्टोरेज जैसे संसाधनों पर खर्च हुई।

कंपनी को दिसंबर तिमाही में यह खर्च 50 अरब डॉलर से ज्यादा रहने की उम्मीद है। वहीं, पूरे कैलेंडर वर्ष 2026 में यह आंकड़ा करीब 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सर्विस Azure का रेवेन्यू सितंबर तिमाही में 48 फीसदी बढ़ा। कंपनी के मुताबिक, ग्राहकों की मांग उपलब्ध क्षमता से ज्यादा बनी हुई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

60,000 कर्मचारियों के बायआउट ऑफर का क्या मतलब?

माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 60,000 योग्य कर्मचारियों को स्वैच्छिक बायआउट ऑफर दिया है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि इनमें से 3,000 या उससे कम कर्मचारी ही इसे स्वीकार करेंगे।

कंपनी की CFO एमी हुड ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट वित्त वर्ष 2027 में भी पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो बनाए रखने की उम्मीद करती है। बेहतर शर्तें मिलने पर कंपनी अतिरिक्त फंडिंग भी जुटाएगी।

बॉन्ड से मिले पैसे का क्या होगा?

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बॉन्ड के जरिए जुटाई गई रकम माइक्रोसॉफ्ट को डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय विकल्प देती है। Moody's और S&P Global Ratings की AAA क्रेडिट रेटिंग भी कंपनी की स्थिति मजबूत बनाती है।

कुल मिलाकर, माइक्रोसॉफ्ट एक तरफ कर्मचारियों से जुड़े फैसले ले रही है, तो दूसरी तरफ भविष्य की ग्रोथ के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही है।