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AI से कैंसर इलाज में बड़ी सफलता, एलन मस्क बोले- बीमारियों का इलाज अब सॉफ्टवेयर की समस्या

अमेरिका की बायोटेक कंपनियों मॉडर्ना और मर्क ने AI की मदद से पर्सनलाइज़्ड कैंसर वैक्सीन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिससे कैंसर के इलाज का तरीका बदल सकता है. टेक अरबपति एलन मस्क का कहना है कि इस तरह की तरक्की से पता चलता है कि बीमारियों का इलाज करना अब सिर्फ़ एक सॉफ्टवेयर की समस्या है.

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In Short

  • मॉडर्ना ने AI की मदद से कैंसर वैक्सीन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है.
  • AI ने मरीज़ों के लिए पर्सनलाइज़्ड वैक्सीन बनाने में मदद की.
  • एलन मस्क का कहना है कि बीमारियों का इलाज करना अब एक सॉफ्टवेयर की समस्या है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ चैटबॉट या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है। हेल्थकेयर में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच अमेरिकी बायोटेक कंपनियों मॉडर्ना और मर्क ने मेलानोमा नाम के गंभीर स्किन कैंसर के लिए अपनी पर्सनलाइज्ड mRNA थेरेपी इंटिस्मेरन ऑटोजेन के फेज 3 ट्रायल के पॉजिटिव नतीजे बताए हैं। इसे मर्क की इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा के साथ टेस्ट किया गया। ट्रायल में 1,000 से ज्यादा हाई-रिस्क मरीज शामिल थे, जिनके ट्यूमर सर्जरी से हटाए जा चुके थे। कंपनियों के मुताबिक, इस कॉम्बिनेशन से कैंसर के दोबारा लौटने या शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने को रोकने में मदद मिली।

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AI ने वैक्सीन बनाने में कैसे मदद की?

यह इलाज आम वैक्सीन की तरह सभी मरीजों के लिए एक जैसा नहीं होता। हर मरीज के ट्यूमर का जेनेटिक सीक्वेंस देखा जाता है और उसमें मौजूद म्यूटेशन की पहचान की जाती है। इसके बाद कंप्यूटेशनल सिस्टम और AI की मदद से उन म्यूटेशन को चुना जाता है, जिनके खिलाफ मरीज का इम्यून सिस्टम सबसे मजबूत प्रतिक्रिया दे सकता है।

इंटिस्मेरन ऑटोजेन मरीज के ट्यूमर से जुड़े अधिकतम 34 खास म्यूटेशन को टारगेट करने के लिए तैयार की जा सकती है। इसके आधार पर mRNA तैयार किया जाता है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स की पहचान करना और उन पर हमला करना सिखाता है।

कीमोथेरेपी से कैसे अलग है यह तरीका?

कीमोथेरेपी कैंसर सेल्स के साथ कुछ हेल्दी सेल्स को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसके उलट पर्सनलाइज्ड mRNA थेरेपी का मकसद मरीज के कैंसर की खास पहचान को निशाना बनाना है। यानी इलाज हर मरीज के ट्यूमर के म्यूटेशनल फिंगरप्रिंट के हिसाब से तैयार किया जाता है।

पहले हुए फेज 2b अध्ययन के पांच साल के डेटा में इंटिस्मेरन और कीट्रूडा के कॉम्बिनेशन से अकेले कीट्रूडा के मुकाबले कैंसर दोबारा होने या मौत का जोखिम 49 फीसदी और दूर के अंगों तक कैंसर फैलने या मौत का जोखिम 59 फीसदी कम देखा गया था।

एलन मस्क ने क्या कहा?

इस डेवलपमेंट के बाद एलन मस्क ने mRNA टेक्नोलॉजी को लेकर कहा कि आर्टिफिशियल RNA बीमारियों के इलाज को एक तरह की “सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम” में बदल सकता है। उनका इशारा इस ओर था कि मरीज के जेनेटिक डेटा के हिसाब से इलाज को डिजाइन किया जा सकता है।

अभी आगे क्या होगा?
मॉडर्ना और मर्क अब फेज 3 के पूरे डेटा को एक इंटरनेशनल मेडिकल मीटिंग में पेश करने और रेगुलेटरी एजेंसियों के सामने मंजूरी के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं। फिलहाल यह एक एक्सपेरिमेंटल थेरेपी है और आम मरीजों के इलाज के लिए अभी मंजूर नहीं हुई है। अगर इसे रेगुलेटरी मंजूरी मिलती है, तो पर्सनलाइज्ड कैंसर ट्रीटमेंट की दिशा में यह बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।