scorecardresearch

16 साल की उम्र में लिया बड़ा फैसला, फिर टेक की दुनिया में लिली चेन ने बनाई अलग पहचान

लिली चेन 16 साल की उम्र में बौद्ध भिक्षु बनीं, फिर अमेरिका लौटकर कॉलेज पहुंचीं और मेटा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी की। इसके बाद उन्होंने एफएसएच टेक्नोलॉजीज शुरू की, जो अब सरकारी तकनीक के क्षेत्र में काम करती है और एक्सेंचर जैसी कंपनियों से मुकाबला करती है।

Advertisement

In Short

  • लिली चेन करीब दो साल तक बौद्ध भिक्षु रहीं और मठ में लोगों की बातें सुनना सीखा
  • कॉलेज में खुद कोडिंग सीखने के बाद चेन मेटा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं
  • एफएसएच टेक्नोलॉजीज ने अब तक 25 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है

लिली चेन की कहानी काफी अलग है। 16 साल की उम्र में बौद्ध भिक्षु बनने वाली चेन बाद में मेटा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं और फिर स्टार्टअप शुरू किया। महामारी के दौरान चेन और उनके बचपन के तीन दोस्तों ने एक हैकाथॉन में प्रोजेक्ट बनाया था। 2021 में इसी प्रोजेक्ट को एफएसएच टेक्नोलॉजीज के तौर पर आगे बढ़ाया गया।

advertisement

एफएसएच टेक्नोलॉजीज ने जुटाए 25 मिलियन डॉलर

एफएसएच टेक्नोलॉजीज अब सरकारी तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी है। यह सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के लिए एक्सेंचर जैसी बड़ी कंसल्टिंग कंपनियों से मुकाबला करती है।

कंपनी अब तक कुल 25 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। हाल ही में उसे 20 मिलियन डॉलर की सीरीज ए फंडिंग मिली, जिसकी अगुवाई लाची ग्रूम ने की। इससे पहले कंपनी ने 5 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई थी।

16 साल की उम्र में छोड़ दिया था स्कूल

चेन को ग्रेव्स डिजीज का पता चलने के बाद उन्होंने 16 साल की उम्र में हाई स्कूल छोड़ दिया था। उनकी मां आध्यात्मिक थीं और उन्होंने दोनों के भिक्षु बनने का सुझाव दिया। चेन को अमेरिका में भिक्षु बनाया गया। इसके बाद वह अपनी मां के साथ ग्रामीण चीन के एक बौद्ध मठ चली गईं। वह करीब दो साल तक भिक्षु रहीं।

मठ में भिक्षु सुबह 3 बजे उठकर ध्यान करते थे। वे खाना उगाते, सफाई करते, पानी लाते और दूसरे काम करते थे। वहां बिजली भी नहीं थी।

मठ में लोगों की बातें सुनना सीखा

मठ में कई लोग अपनी परेशानियां लेकर आते थे। चेन के मुताबिक भिक्षु जरूरी नहीं कि उनकी समस्याओं का समाधान बताते थे, बल्कि उनकी बातें सुनते थे।

चेन ने कहा कि भिक्षु बनने के दौरान उन्होंने सबसे जरूरी चीज दूसरों की बातें सुनना सीखा। मठ के प्रमुख भिक्षु ने उनकी पढ़ने में रुचि देखी और उन्हें अमेरिका लौटकर कॉलेज जाने के लिए कहा।

बिना हाई स्कूल डिप्लोमा के कॉलेज पहुंचीं

अमेरिका लौटने के बाद चेन के पास हाई स्कूल डिप्लोमा नहीं था और उन्हें कॉलेज में दाखिले की प्रक्रिया भी नहीं पता थी। उनका प्लान जीईडी करने, कम्युनिटी कॉलेज जाने और फिर आगे पढ़ाई करने का था।

एक दिन पब्लिक लाइब्रेरी में लगे कॉलेज फेयर में उन्हें कोलोराडो कॉलेज के बारे में पता चला। उन्होंने एसीटी में 36 अंक हासिल किए, जो सबसे ज्यादा संभव स्कोर था। इसके बाद उन्हें कोलोराडो कॉलेज में दाखिला मिल गया।

मेटा की नौकरी छोड़ी और शुरू की कंपनी

कॉलेज में चेन ने खुद कोडिंग सीखी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मेटा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं। लेकिन एक साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर एफएसएच टेक्नोलॉजीज शुरू कर दी।

advertisement

कंपनी शहरों, स्कूल जिलों और राज्य एजेंसियों के लिए सॉफ्टवेयर बनाती है। चेन के मुताबिक कंपनी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के लिए एक्सेंचर से भी मुकाबला करती है।

चेन का कहना है कि एफएसएच कंसल्टिंग के घंटों के हिसाब से शुल्क नहीं लेती और कंपनी में अलग सेल्सपर्सन या कंसल्टेंट भी नहीं हैं। उनका लक्ष्य सफल प्रोजेक्ट्स के जरिए सरकारों का भरोसा जीतना है।