धरती के बाद अब Space में AI की तैयारी, Google के Project Suncatcher पर Musk का रिएक्शन
AI कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच Google अब अंतरिक्ष में AI इंफ्रास्ट्रक्चर की संभावनाएं तलाश रहा है। कंपनी Project Suncatcher के तहत TPU चिप्स से लैस अपना पहला सैटेलाइट लॉन्च करने जा रही है। इस मिशन के जरिए यह जांचा जाएगा कि क्या AI हार्डवेयर अंतरिक्ष के कठिन माहौल में काम कर सकता है।

In Short
- Google Project Suncatcher के तहत Space में TPU चिप्स टेस्ट करेगा।
- Elon Musk ने कहा Space में भविष्य में ज्यादा कंप्यूटिंग हो सकती है।
- मिशन में AI हार्डवेयर, रेडिएशन और कूलिंग सिस्टम की जांच होगी।
AI कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच अब टेक कंपनियां अंतरिक्ष में AI इंफ्रास्ट्रक्चर की संभावनाएं तलाश रही हैं। गूगल ने ऐलान किया है कि वह जल्द ही अपने एडवांस्ड TPU चिप्स से लैस एक सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा। यह मिशन कंपनी के Project Suncatcher का हिस्सा है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्या भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर AI कंप्यूटिंग संभव हो सकती है।

गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने इस लॉन्च की जानकारी देते हुए X पर लिखा, “One small step for TPUs....” उन्होंने अपनी पोस्ट में चंद्रमा पर नील आर्मस्ट्रॉन्ग के ऐतिहासिक वाक्य का संदर्भ दिया।
Project Suncatcher के तहत गूगल एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में भेजेगा, जिसमें कंपनी के Tensor Processing Units यानी TPU चिप्स लगाए गए हैं। यह सैटेलाइट SpaceX के Transporter-18 rideshare मिशन के जरिए Planet Labs के साथ साझेदारी में लॉन्च किया जाएगा।
इस टेस्ट का मकसद यह जानना है कि क्या गूगल के AI चिप्स अंतरिक्ष में लॉन्च के दौरान आने वाले तेज कंपन, रेडिएशन और ज्यादा तापमान जैसी चुनौतियों को झेल सकते हैं।
अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर की तैयारी?
इस खबर पर एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी है। मस्क लंबे समय से अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने के विचार का समर्थन करते रहे हैं।

मस्क ने X पर लिखा कि भविष्य में अंतरिक्ष में मौजूद कंप्यूटिंग क्षमता कुल कंप्यूटिंग का बड़ा हिस्सा बन सकती है। हालांकि, गूगल ने साफ किया है कि Project Suncatcher अभी शुरुआती रिसर्च मिशन है और इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में ऑपरेशनल डेटा सेंटर शुरू करना नहीं है।
धरती पर AI डेटा सेंटर चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। वहीं, लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट लगातार सूर्य की रोशनी से ऊर्जा हासिल कर सकते हैं। इसी वजह से कई कंपनियां अंतरिक्ष-आधारित AI कंप्यूटिंग की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
TPU चिप्स को लेकर बड़ी चुनौती
गूगल के मुताबिक, रॉकेट लॉन्च के दौरान सैटेलाइट को करीब 10 G तक के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी ने अपने हार्डवेयर की टेस्टिंग कंपन और रेडिएशन जैसी परिस्थितियों में की है।
इसके अलावा अंतरिक्ष में कूलिंग भी बड़ी चुनौती है, क्योंकि वहां हवा नहीं होती। गूगल हीट पाइप और रेडिएटर सिस्टम के जरिए TPU चिप्स से निकलने वाली गर्मी को नियंत्रित करने की तकनीक पर काम कर रहा है।
गूगल की लंबी अवधि की योजना कई सैटेलाइट्स के क्लस्टर बनाने की है, जिनमें दर्जनों TPU चिप्स लगाए जा सकते हैं। कंपनी 2027 में दो सैटेलाइट के जरिए आपस में डेटा कनेक्शन और लेजर लिंक की टेस्टिंग करने की योजना बना रही है।
AI और अंतरिक्ष के इस क्षेत्र में गूगल के अलावा एलन मस्क की कंपनियां, ब्लू ओरिजिन और अन्य टेक कंपनियां भी भविष्य की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।

