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'हम 20 साल आगे की सोच रहे हैं', अश्विनी वैष्णव ने बताया कैसे टेक्नोलॉजी के मामले में मजबूत बनेगा भारत

भारत आने वाले 20 से 25 वर्षों के लिए टेक्नोलॉजी की बड़ी रणनीति तैयार कर रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने और सेमीकंडक्टर जैसे अहम क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। उन्होंने AI से नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी अहम चेतावनी दी।

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अश्विनी वैष्णव ने चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर जरूरी मटेरियल, केमिकल और गैस तक, पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।
अश्विनी वैष्णव ने चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर जरूरी मटेरियल, केमिकल और गैस तक, पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।

In Short

  • अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अगले 20 से 25 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर टेक्नोलॉजी की रणनीति बना रहा है।
  • सेमीकंडक्टर, जरूरी कंपोनेंट्स और रिसर्च में घरेलू क्षमता बढ़ाकर विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर।
  • वैष्णव ने चेताया कि AI से रोजगार और सर्विस सेक्टर में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

भारत आने वाले 20 से 25 वर्षों को ध्यान में रखकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी तैयारी कर रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार ऐसी तकनीकों में विदेशी देशों पर निर्भरता कम करना चाहती है, जो देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। हालांकि, इसका मतलब दुनिया से अलग होकर काम करना नहीं है। भारत अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने के साथ भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ भी काम करता रहेगा।

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नई दिल्ली में 14 अक्टूबर को आयोजित Bloomberg New Economy Forum में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया में राजनीतिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी प्राथमिकताओं और रणनीति की लगातार समीक्षा करनी होगी।

उन्होंने कहा, "भारत में हम कम से कम 20 साल आगे की सोच रहे हैं।"

टेक्नोलॉजी के लिए क्या है सरकार का प्लान?

वैष्णव ने बताया कि सरकार ने तकनीकी विकास के लिए तीन स्तरों पर लक्ष्य तय किए हैं। पहला लक्ष्य अगले 3 से 5 साल, दूसरा 5 से 15 साल और तीसरा 20 से 25 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

इस रणनीति का मकसद उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां विदेशी सप्लाई पर निर्भरता भविष्य में भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि केवल चिप डिजाइन या मैन्युफैक्चरिंग पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जरूरी केमिकल, गैस, मटेरियल और दूसरे कंपोनेंट्स का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में इन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का उदाहरण देते हुए वैष्णव ने बताया कि भारत अब केवल फोन असेंबल करने तक सीमित नहीं है। देश में कई जरूरी कंपोनेंट्स भी बनने लगे हैं और इनमें से कुछ का निर्यात भी हो रहा है।

उन्होंने रिसर्च और डेवलपमेंट पर अधिक खर्च करने की जरूरत भी बताई, ताकि नई तकनीकों को व्यावसायिक इस्तेमाल के लायक बनाया जा सके।

AI से नौकरियों पर क्या असर पड़ सकता है?

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से साढ़े तीन साल में अपना 4G टेलीकॉम सिस्टम तैयार किया। उनके मुताबिक, यह सिस्टम एक लाख से ज्यादा टावरों पर इस्तेमाल हो रहा है।

उन्होंने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले बदलावों को लेकर भी चिंता जताई। वैष्णव के अनुसार, AI विशेष रूप से सर्विस सेक्टर में काम करने के तरीकों और रोजगार पर बड़ा असर डाल सकता है।

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उन्होंने कहा कि विकसित देशों में बढ़ते कर्ज और तकनीकी बदलावों से आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

वैष्णव ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में भारत का सार्वजनिक कर्ज और GDP का अनुपात 61% से घटकर 55% हुआ है।

उनके मुताबिक, भारत का लक्ष्य आर्थिक, वित्तीय और तकनीकी रूप से खुद को इतना मजबूत बनाना है कि भविष्य में वैश्विक संकटों का असर कम से कम पड़े।