Business Today India At 100 Summit में AI पर चर्चा! ऑटोमेशन के दौर में नौकरियों का क्या होगा?
भारत में AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। Business Today India At 100 Summit में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, जहां Professor S. Mahendra Dev ने बताया कि तकनीक के बदलते दौर में स्किल सुधार और निजी निवेश रोजगार के नए अवसर तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियों को लेकर बहस अब और तेज हो गई है। फैक्ट्रियों में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तकनीक नौकरियों को कम करेगी या नए अवसर पैदा करेगी।
Business Today India At 100 Summit में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान Professor S. Mahendra Dev, Chairman, Economic Advisory Council to the Prime Minister ने कहा कि तकनीकी बदलाव के दौर में भारत को अपने कर्मचारियों को नई जरूरतों के हिसाब से तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि स्किल सुधार और निजी निवेश रोजगार के भविष्य के लिए सबसे अहम होंगे।
फैक्ट्रियों में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता
अब यह चिंता सिर्फ अनुमान तक सीमित नहीं है। ज्यादा से ज्यादा फैक्ट्रियां मशीनों और रोबोटिक्स को अपना रही हैं, वहीं कई जगहों पर कर्मचारियों की कमी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में चुनौती सिर्फ फैक्ट्रियां बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनसे पर्याप्त और बेहतर रोजगार पैदा हों।
चर्चा के दौरान कहा गया कि कुछ जगहों पर फैक्ट्रियां अपनी आधी तक वर्कफोर्स को बदल सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ का कहना है कि AI का कुल असर लंबे समय में सकारात्मक रह सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ बैकएंड नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन उनकी जगह ज्यादा स्किल वाली नौकरियां पैदा होंगी।
स्किल की कमी बनेगी सबसे बड़ी चुनौती
AI के दौर में सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों की स्किल को लेकर है। जो लोग मौजूदा नौकरियां खो सकते हैं, जरूरी नहीं कि उनके पास नई नौकरियों के लिए जरूरी योग्यता हो।
Professor S. Mahendra Dev ने कहा कि भारत को स्किल सुधारने पर तेजी से काम करना होगा। अगर समय पर कर्मचारियों को नई तकनीक के हिसाब से तैयार नहीं किया गया तो नौकरी जाने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर पढ़े लिखे युवाओं के लिए चुनौती यह है कि उन्हें बेहतर और औपचारिक क्षेत्र की नौकरियां मिलने में ज्यादा समय लग रहा है।
रोजगार के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका अहम
भारत में रोजगार पैदा करने में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे बड़ी है। चर्चा में कहा गया कि सरकार कुल नौकरियों का छोटा हिस्सा ही पैदा करती है, जबकि ज्यादातर रोजगार निजी कंपनियों से आते हैं।
ऐसे में बड़े स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए निजी निवेश जरूरी है। सरकार की ओर से मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन कंपनियों को अब निवेश के लिए आगे बढ़ना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सामने बड़ी परीक्षा
भारत मैन्युफैक्चरिंग को आर्थिक विकास का बड़ा आधार बनाना चाहता है और ज्यादा लोगों को कृषि से बेहतर रोजगार की ओर ले जाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में AI सिर्फ तकनीक का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि भारत भविष्य के उद्योगों के लिए कितनी तैयार वर्कफोर्स बना पाता है।
चर्चा का संदेश साफ रहा कि ऑटोमेशन को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके फायदे तभी मिलेंगे जब स्किल, निवेश और सुधार की रफ्तार तकनीकी बदलाव के साथ बनी रहे।

