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IT Stocks Recovery: आईटी शेयरों में क्यों आई अचानक तेजी? क्या निवेश का यह सही मौका है?

ग्लोबल टेक बजट और विशेषज्ञों की राय विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) ने अपने नवीनतम 'यूबीएस एविडेंस लैब सर्वे' में अनुमान जताया है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक आईटी बजट औसतन 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, यह अक्टूबर 2025 के सर्वे (4.6 प्रतिशत) की तुलना में थोड़ा कम है, जो ईरान संकट के कारण उपजी वैश्विक सतर्कता को दर्शाता है।

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विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड दोनों 4 प्रतिशत बढ़े, जबकि टेक महिंद्रा लिमिटेड ने उसी अवधि में 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।
विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड दोनों 4 प्रतिशत बढ़े, जबकि टेक महिंद्रा लिमिटेड उसी अवधि में 6 प्रतिशत बढ़ा। (एआई जनित छवि)

आईटी शेयरों में शानदार रिकवरी: NSE IT इंडेक्स दशक के सबसे मजबूत सपोर्ट से उछला, इंफोसिस-TCS में तेजी

भारतीय आईटी (Information Technology) शेयरों में हाल ही में एक मजबूत रिकवरी देखी गई है। NSE IT इंडेक्स अपने दशक पुराने 'ट्रेंडलाइन सपोर्ट' से करीब 6 प्रतिशत उछला है, जो बाजार में ओवरसोल्ड कंडीशंस (Oversold Conditions) के बीच एक मजबूत बाउंस-बैक का संकेत है। इस रिकवरी में देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस लिमिटेड (Infosys) सबसे आगे रही, जिसके शेयर पिछले पांच सत्रों में 7 प्रतिशत तक चढ़े हैं। वहीं, देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी टीसीएस (TCS) ने इसी अवधि में 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। इसके अलावा विप्रो (Wipro) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Tech) के शेयरों में 4 प्रतिशत, जबकि टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) में 6 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।

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क्या कहते हैं ऐतिहासिक पैटर्न और ब्रोकरेज? घरेलू ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2006 में NSE IT इंडेक्स ने अधिकतम 35 प्रतिशत का 'मूल्य-सापेक्ष सुधार' (Price Correction) देखा था, जबकि 'समय-सापेक्ष सुधार' (Time Correction) छह से सात तिमाहियों (Quarters) तक चला था। वर्तमान परिदृश्य में, इंडेक्स पिछले छह तिमाहियों में लगभग 42 प्रतिशत के सुधार के बाद अपनी दीर्घकालिक बढ़ती हुई ट्रेंडलाइन के करीब पहुंच गया है। ब्रोकरेज का मानना है कि ऐतिहासिक पैटर्न्स के साथ यह मेल मौजूदा स्तरों पर निवेशकों के लिए एक बेहद अनुकूल 'जोखिम-इनाम सेटअप' (Risk-Reward Setup) पेश करता है।

लिवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और सेबी-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद के. ने कहा, “बाजार में आईटी सेक्टर एक मजबूत डिफेंसिव सेक्टर के रूप में काम कर रहा है। इंफोसिस और टीसीएस जैसे तकनीकी निर्यातकों को भारतीय रुपये में जारी कमजोरी का सीधा फायदा मिलने की संभावना है। घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन (Depreciation) से निर्यात आधारित व्यवसायों की कमाई और मार्जिन में स्पष्टता बढ़ती है।”

ग्लोबल टेक बजट और विशेषज्ञों की राय विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) ने अपने नवीनतम 'यूबीएस एविडेंस लैब सर्वे' में अनुमान जताया है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक आईटी बजट औसतन 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। हालांकि, यह अक्टूबर 2025 के सर्वे (4.6 प्रतिशत) की तुलना में थोड़ा कम है, जो ईरान संकट के कारण उपजी वैश्विक सतर्कता को दर्शाता है। यूबीएस ने 12 मई की अपनी रिपोर्ट में कहा था, "यह गिरावट टेक बजट में मध्यम एकल अंक (Mid-single digit) की वृद्धि की हमारी उम्मीदों को बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं करती है। एंटरप्राइज सर्वे संकेत देते हैं कि आईटी सेवाओं पर होने वाला खर्च कुल आईटी बजट के अनुरूप ही बढ़ता रहेगा।"

रेनैसांस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और सीआईओ पंकज मुरारका ने भी आईटी शेयरों के वैल्यूएशन को मौजूदा स्तरों पर काफी आकर्षक बताया है। लगभग 5,000 करोड़ रुपये का एसेट बेस (AUM) संभालने वाली उनकी फर्म का आईटी सेक्टर में करीब 10 प्रतिशत का एक्सपोजर है। मुरारका ने आईटी कंपनियों को 'कैश मशीन' बताते हुए कहा, “ये उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियां हैं, जिनकी बैलेंस शीट पूरी तरह कर्ज मुक्त (Debt-Free) है और उनके पास भारी मात्रा में सरप्लस कैश उपलब्ध है।”

वहीं, अरिहंत कैपिटल मार्केट्स का मानना है कि भारतीय आईटी स्टॉक निवेश का एक बेहतरीन मौका दे रहे हैं, क्योंकि ये अपने तीन और सात साल के ऐतिहासिक औसत पी/ई (P/E Multiples) की तुलना में 30 प्रतिशत के बड़े डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं। ब्रोकरेज के अनुसार, रुपये का अवमूल्यन बिना किसी अतिरिक्त परिचालन प्रयास के सीधे इन कंपनियों के रिपोर्टेड रेवेन्यू, मार्जिन और ईपीएस (EPS) में बढ़ोतरी करता है क्योंकि इनकी मुख्य कमाई अमेरिकी डॉलर में होती है, जबकि लागत रुपये में आती है।

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