शेयर बाजार में अभी नहीं आएगी एकतरफा तेजी! एक्सपर्ट ने बताया निफ्टी का अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
एक्सपर्ट ने कहा कि बेंचमार्क इंडेक्स अभी भी एक तय दायरे में फंसा हुआ है. उन्होंने कहा कि मार्केट आपको शांति से एकतरफ़ा ऊपर आते हुए नहीं दिखेगा और इस बात पर ज़ोर दिया कि ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) बना रहेगा.

In Short
- एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल शेयर बाजार में एकतरफा तेजी की संभावना कम है और शॉर्ट टर्म में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है।
- निफ्टी के लिए 23,800 अहम सपोर्ट लेवल है, जबकि 24,300–24,350 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
- अगले 2–3 महीनों के लिए बाजार का आउटलुक सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को शॉर्ट टर्म की वोलैटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए।
शुक्रवार को शेयर बाजार में जारी अच्छी रैली के बीच आज बिजनेस टुडे के शो Daily Calls में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए पीएचडी कैपिटल के संस्थापक एवं सीईओ, प्रदीप हल्दर ने कहा कि मार्केट के एकतरफ़ा तेज़ी से ऊपर जाने की संभावना कम है।
उनका मानना है कि मीडियम-टर्म आउटलुक अच्छा होने के बावजूद, शॉर्ट-टर्म में कंसोलिडेशन (उतार-चढ़ाव के साथ एक दायरे में बने रहना) जारी रहेगा। हल्दर ने कहा कि मार्केट ने निचले स्तरों पर, खासकर निफ्टी में 23,800 के आसपास बार-बार मज़बूती दिखाई है, भले ही ग्लोबल अनिश्चितता के बीच ट्रेडर्स वीकेंड तक एग्रेसिव पोजीशन बनाए रखने को लेकर सतर्क हैं।
सपोर्ट बना हुआ है, लेकिन ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित है
एक्सपर्ट ने कहा कि बेंचमार्क इंडेक्स अभी भी एक तय दायरे में फंसा हुआ है. उन्होंने कहा कि मार्केट आपको शांति से एकतरफ़ा ऊपर आते हुए नहीं दिखेगा और इस बात पर ज़ोर दिया कि ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) बना रहेगा.
उन्होंने 23,800 को एक अहम सपोर्ट लेवल बताया है जो बार-बार बना रहा है, जबकि 24,300-24,350 के ज़ोन को निफ्टी के लिए तुरंत रेजिस्टेंस बैंड के तौर पर चिह्नित किया है. इससे पता चलता है कि मार्केट बहुत जल्द किसी बड़े ब्रेकआउट के बजाय कंसोलिडेशन के दौर में ही उतार-चढ़ाव करता रहेगा.
पॉजिटिव बातों से ज़्यादा जियोपॉलिटिक्स का सेंटीमेंट पर असर
एक्सपर्ट ने कहा कि मार्केट घरेलू या रणनीतिक स्तर पर अच्छी घटनाओं की तुलना में नेगेटिव ग्लोबल ट्रिगर्स पर ज़्यादा तेज़ी से प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि भारत की व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी जैसी सकारात्मक बातें शायद बाजार के मूड को बहुत ज्यादा नहीं सुधार रही हैं, लेकिन निवेशक किसी भी बाहरी झटके को गंभीरता से ले रहे हैं.
उनका कहना है कि यही असंतुलन बाजार के मौजूदा व्यवहार को तय कर रहा है: बाजार इतना मजबूत है कि उसमें बड़ी गिरावट नहीं आ रही, लेकिन उसमें इतनी तेजी लाने का भरोसा भी नहीं है कि बाजार बहुत ऊपर चला जाए.
मध्यम अवधि का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है
एक्सपर्ट ने कहा कि अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन और अगले कुछ महीनों के बीच साफ अंतर बताया. उन्होंने कहा, "अगले दो-तीन महीनों में कोई समस्या नहीं दिख रही है. दो-तीन महीनों के लिए नजरिया निश्चित रूप से सकारात्मक है."
इससे पता चलता है कि निवेशकों को शॉर्ट-टर्म इंडेक्स में होने वाले उतार-चढ़ाव को अपनी व्यापक पोर्टफोलियो रणनीति से अलग रखने की जरूरत हो सकती है. हालांकि खबरों के कारण बेंचमार्क में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन हल्दर का मुख्य संदेश यह है कि बाजार का ढांचा इतना मजबूत है कि अगले दो से तीन महीनों में स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच (खास शेयरों पर ध्यान देने की रणनीति) अपनाई जा सकती है.

