2026 में रियल एस्टेट से नहीं होगी पहले जैसी कमाई! नाइट फ्रैंक ने बताया किसके लिए सबसे बेहतर रहेगा बाजार
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए नाइट फ्रैंक इंडिया के नेशनल डायरेक्टर-रिसर्च, विवेक राठी ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर अपने मौजूदा अपसाइकल के पांचवें साल में है।

In Short
- नाइट फ्रैंक इंडिया के मुताबिक, 2026 में रियल एस्टेट बाजार में वास्तविक जरूरत वाले खरीदारों की भूमिका बढ़ेगी, जबकि निवेशकों के लिए आसान कमाई के मौके घटेंगे।
- मांग में नरमी के बीच डेवलपर्स खरीदारों को आकर्षित करने के लिए लचीले पेमेंट प्लान और अन्य ऑफर दे रहे हैं।
- होम लोन की ब्याज दरें अभी भी अनुकूल हैं और मजबूत अर्थव्यवस्था के चलते 2026 में आवासीय बाजार के स्थिर बने रहने की उम्मीद है।
भारत का रिहायशी रियल एस्टेट बाजार 2026 में निवेशकों के लिए पहले जैसी तेज कमाई का मौका नहीं देगा, लेकिन अपना घर खरीदने वालों के लिए हालात अनुकूल बने रहेंगे। नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां खरीदारी की अगुवाई वास्तविक जरूरत वाले खरीदार करेंगे, जबकि सट्टेबाजी वाले निवेश की भूमिका सीमित होती जाएगी।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए नाइट फ्रैंक इंडिया के नेशनल डायरेक्टर-रिसर्च, विवेक राठी ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर अपने मौजूदा अपसाइकल के पांचवें साल में है। ऐसे में निवेशकों के लिए पहले जैसी बड़ी कमाई करना मुश्किल होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ खास इलाकों या सेगमेंट में अवसर बने रह सकते हैं।
मांग स्थिर, डेवलपर्स दे रहे हैं राहत
राठी के मुताबिक, मौजूदा बाजार एंड-यूजर्स पर आधारित है। मांग में नरमी को देखते हुए डेवलपर्स खरीदारों को आकर्षित करने के लिए लचीले पेमेंट ऑप्शन और दूसरे प्रोत्साहन दे रहे हैं।
2026 की पहली छमाही में देश के आठ प्रमुख शहरों में करीब 1.71 लाख घरों की बिक्री हुई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 0.7% अधिक रही। यह संकेत देता है कि मांग बनी हुई है, लेकिन अब उसमें पहले जैसी तेज रफ्तार नहीं है।
सालभर बाजार में रहेगी मजबूती
नाइट फ्रैंक का अनुमान है कि 2026 में आवासीय बाजार का प्रदर्शन 2025 के स्तर के आसपास रह सकता है, जो पहले से ही कई वर्षों के उच्च स्तर पर था। रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार में गिरावट नहीं बल्कि स्थिरता और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने का संकेत है।
राठी ने कहा कि होम लोन की ब्याज दरें अभी भी खरीदारों के लिए आरामदायक स्तर पर हैं। वहीं, देश की अर्थव्यवस्था करीब 6.6% से 6.7% की दर से बढ़ रही है। संपत्ति निर्माण की रफ्तार भले कुछ धीमी हुई हो, लेकिन घरेलू संपत्ति में बड़ी गिरावट नहीं आई है। इसका फायदा खासतौर पर प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट को मिलता रह सकता है।

