सोमवार 9 मार्च को कैसी रह सकती है बाजार की चाल? जानिए क्या मिल रहे हैं संकेत
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को भारतीय बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई और संकेत मिल रहे हैं कि सोमवार को भी कारोबार कमजोर रह सकता है।

Sensex, Nifty outlook for Monday, March 9: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को भारतीय बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई और संकेत मिल रहे हैं कि सोमवार को भी कारोबार कमजोर रह सकता है।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,097 अंक (1.37%) गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 315.45 अंक (1.27%) फिसलकर 24,450.45 पर आ गया। दोनों प्रमुख सूचकांक पूरे सप्ताह में करीब 3% तक गिर गए, जो बाजार में बढ़ती चिंता को दिखाता है।
सोमवार को कमजोर शुरुआत के संकेत
सोमवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज पर निफ्टी फ्यूचर्स 274 अंक यानी करीब 1.11% गिरकर 24,300 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे संकेत मिलता है कि नए सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव के साथ खुल सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली है। उनके मुताबिक तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं और भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं तो इससे भारत के राजकोषीय घाटे, महंगाई और RBI की मौद्रिक नीति पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही अमेरिकी 10 साल के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों में जोखिम कम कर रहे हैं।
किन सेक्टरों पर ज्यादा असर
एक्सपर्ट के मुताबिक पिछले सप्ताह बाजार में गिरावट लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली। हालांकि रियल्टी, बैंकिंग और ऑटो जैसे ब्याज दर से संवेदनशील सेक्टरों में ज्यादा दबाव रहा। ऊर्जा लागत बढ़ने और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटने से इन सेक्टरों में बिकवाली तेज रही।
रिलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी रिसर्च अजीत मिश्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है। सप्लाई में संभावित बाधा के कारण ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे भारत में महंगाई की चिंता बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव डाल रही है। पिछले सप्ताह FIIs ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 21,831 करोड़ रुपये की निकासी की।
बाजार के लिए अहम स्तर
तकनीकी स्तरों की बात करें तो निफ्टी के लिए 24,050 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जो 100-सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के करीब है। इसके नीचे टूटने पर गिरावट 23,800 तक बढ़ सकती है। वहीं ऊपर की ओर 24,800–25,200 का दायरा मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
सेंसेक्स के लिए 78,500-78,800 का क्षेत्र प्रमुख सपोर्ट जोन है, जबकि 79,800 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
निवेशकों के लिए रणनीति
एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को सतर्क और अनुशासित रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच फार्मा, डिफेंस, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और ऊर्जा सेक्टर में चुनिंदा अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि घबराहट में बिकवाली से बचना चाहिए और निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिये के साथ फैसले लेने चाहिए।

