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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से हॉस्पिटल शेयर दबाव में, लेकिन इस स्टॉक पर ब्रोकरेज की BUY रेटिंग- चेक करें टारगेट

आज कंपनी का शेयर 3.21% या 8.50 रुपये की तेजी के साथ 273.60 रुपये पर बंद हुआ और एनएसई पर स्टॉक 2.33% या 6.25 रुपये चढ़कर 274 रुपये पर बंद हुआ।

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पिछले हफ्ते हॉस्पिटल शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली, जब सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि निजी अस्पताल कैंसर की दवाओं पर कितना मार्जिन कमा रहे हैं। इसके बाद निवेशकों की नजर हॉस्पिटल स्टॉक्स पर पड़ी और बड़े-बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

इनमें से एक शेयर है पार्क मेडी वर्ल्ड लिमिटेड (Park Medi World Ltd) है जिसपर ब्रोकरेज Emkay बुलिश है और 37% तक की अपसाइड की संभावना जताई है। ब्रोकरेज ने BUY कॉल के साथ ₹375 का टारगेट दिया है। आज कंपनी का शेयर 3.21% या 8.50 रुपये की तेजी के साथ 273.60 रुपये पर बंद हुआ और एनएसई पर स्टॉक 2.33% या 6.25 रुपये चढ़कर 274 रुपये पर बंद हुआ।

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दरअसल कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि कैंसर की दवाओं से कंपनी की बिक्री 2% से भी कम है। इसके अलावा, कंपनी के ज्यादातर मरीज सरकारी योजनाओं के जरिए इलाज कराते हैं और यही वजह है कि दूसरे हॉस्पिटल शेयरों में गिरावट के बावजूद Park Medi World को लेकर ब्रोकरेज पॉजिटिव हैं।

कंपनी ने बताया कि उसकी आय में Oncology ड्रग्स (कैंसर की दवाओं) की हिस्सेदारी 2% से भी कम है। वहीं, कंपनी के कुल रेवेन्यू का 77% हिस्सा सरकारी योजनाओं से आता है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में कंपनी का EBITDA मार्जिन 26.5% रहा।

कंपनी के मुताबिक उसके रेवेन्यू में ऑन्कोलॉजी और कीमोथेरेपी दवाओं की हिस्सेदारी 2% से भी कम है। कंपनी ने बताया कि दूसरी सरकारी बीमा योजनाओं में दवाओं की कीमत पहले से तय पैकेज में शामिल होती है, इसलिए MRP पर कैप लगने से इस रेवेन्यू पर सीधा असर नहीं पड़ता। इसके अलावा, सरकारी बीमा कंपनियां महंगी कैंसर दवाओं पर पहले से 30% की छूट मांगती हैं और Park Medi World यह छूट पहले ही देती है, इसलिए इसका असर कंपनी के मौजूदा वित्तीय आंकड़ों में शामिल है। 

सुप्रीम कोर्ट के सावल के बाद 5% गिरा था BSE Hospitals Index

30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक कैंसर की दवा का उदाहरण देते हुए बताया था कि जो दवा रिटेलर को करीब ₹2,700 में मिलती है, उसका MRP करीब ₹27,000 था। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि शेड्यूल्ड दवाओं पर लागू 16% ट्रेड मार्जिन की सीमा गैर-शेड्यूल्ड दवाओं पर क्यों नहीं लागू होनी चाहिए।

इसके बाद BSE Hospitals Index करीब 5% गिरा और कुछ बड़ी हॉस्पिटल कंपनियों के शेयर दो कारोबारी सत्रों में 10% तक टूट गए।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।